केके पाठक का शिक्षा विभाग इस वक्त एक्शन मोड में है। विभाग की तरफ से टीचरों और शिक्षक नेताओं को साफ तौर यह चेतावनी दी गई थी कि यदि वह मीडिया, सोशल मीडिया और अखबारों में अनर्गल बयान देंगे तो उनपर सख्त कार्रवाई होगी। नियम के उल्लंघन को लेकर शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक नेता के वेतन-पेंशन पर रोक लगा दी है।
आरा में शिक्षक नेता का रोका गया वेतन-पेंशन
दरअसल, आरा में विश्वविद्यालय के कॉलेजों में प्रत्येक शिक्षक को एक दिन में पांच कक्षा संचालित करने का शिक्षक संघ फुटाब का विरोध करने पर उच्च शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है।उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक, रेखा कुमारी ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. रणविजय कुमार को पत्र भेजकर फुटाब के अध्यक्ष प्रो. कन्हैया बहादुर सिन्हा का पेंशन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है। वहीं, निदेशक ने फुटाब के महासचिव सह विधान पार्षद डा. संजय कुमार सिंह का भी वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।
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उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि प्रत्येक शिक्षक को प्रतिदिन पांच कक्षा संचालित करने और कक्षा से लगातार तीन दिनों तक अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने का उक्त दोनों शिक्षक नेताओं ने विरोध किया है। इसके अलावा, दोनों निर्देश शिक्षा में गुणवक्ता के लिए किया गया है। शिक्षा विभाग ने इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के प्रयास का विरोध माना है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय सेवा शिक्षक संघ ने भी 27 नवंबर को उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश का विरोध किया है।
शिक्षा विभाग का यह है आदेश
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय का कोई भी शिक्षक अथवा शिक्षकेतर कर्मचारी अनर्गल बयान देंगे तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी साफ किया है कि स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक तक किसी भी शिक्षक और कर्मी के द्वारा किसी संघ की स्थापना नहीं की जाएगी और ना ही उसका सदस्य कोई बनेगा। ऐसा करने वालों पर भी कठोर अनुशासिनी कार्रवाई होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने मंगलवार को सभी विश्वविद्यालयों की कुलपति और सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र जारी किया है।
नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश
विभाग द्वारा जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर ना हीं किसी शिक्षक अथवा नहीं किसी कर्मचारी के संघ को विभाग ने मान्यता नही दी है। विभाग का निर्देश है कि इस निर्देश का सख्ती से पालन करें। विभाग के संज्ञान में आया है कि अखबार और सोशल मीडिया के माध्यम से कई तरह की बयानबाजी की जा रही है जिसे कदाचार माना जाएगा।