दरभंगा में जन सुराज पदयात्रा के दौरान लालू पर जमके बरसे प्रशांत किशोर

बिहार : प्रशांत किशोर की जन सुराज पदयात्रा बिहार के दरभंगा जिले में चल रही है। वह इन दिनों घनश्यामपुर प्रखंड में हैं। यहां की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया शेयर की गई हैं। इसी क्रम में रविवार को प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में आप जितनी मजबूती से किसी दल, किसी नेता का साथ देते हैं काम न होने पर उतनी ही मजबूती से उसका विरोध भी कीजिए।

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, कहा- 'बिहार सरकार चाहती है कि समाज में लोग आपस  में लड़ते-झगड़ते रहें' | Prashant Kishor big statement Bihar government  wants people to keep fighting ...

लोकतंत्र में आपको क्या बताया जाता है कि आप किसी व्यक्ति, किसी विचारधारा, किसी दल को भरोसा करके 5 साल दीजिए। वो काम करे तो उसके साथ खड़े होइए और अगर काम नहीं करे तो बिल्कुल उसके विरोध में उतनी मजबूती से खड़े होइए। उसको हराइए। नहीं हराइएगा तो पूरी पीढ़ी बर्बाद कर देगा। उसका अंधभक्त मत बनिए। ये गलत है। जो भी काम करे, उसका समर्थन होना चाहिए और जो भी काम नहीं करे उसका विरोध होना चाहिए। चाहे कोई हो, चाहे हमारी जाति का हो, हमारी विचारधारा का हो। जब तक यह नहीं कीजिएगा, तब तक नहीं सुधरेगा बिहार।

जीत का खाका तैयार करके आया हूं : प्रशांत किशोर

हम उनमें से नहीं हैं जो लड़ने के लिए लड़ता है। हम अगर लड़नके आए हैं तो ये सोच-समझकर आए हैं कि इसको करने में इसको जीतने के लिए कैसा व्यवस्था बनानी पड़ेगी। कितना संसाधन लगाना पड़ेगा। कितना पसीना बहाना पड़ेगा। अगर लड़ने आए हैं तो आप मानकर चलिए कि इसको जीतने का खाका दिमाग में बनाकर लाए हैं।

चंद परिवारों की जागीर बनकर रह गया है बिहार : पीके

पिछले 30 सालों में बिहार में जितने आदमी MLA-MP बने हैं, चाहे जिस दल से बने हों। सबका नाम लिखिएगा और सूची बनाइएगा तो आपको पता चलेगा कि 1250 से 1500 परिवारों के लोग ही यहां MLA-MP बनते हैं। जो पहले लालू जी के साथ थे, वही उछल के अब नीतीश जी के साथ है। जो पहले कांग्रेस का काम करता था अब वो भाजपा का कर रहा है। वही लोग घूम-फिरकर रहते हैं।

बिहार की 13 करोड़ आबादी में 3.5 करोड़ परिवार हैं। 3.5 करोड़ परिवार में से 1250 परिवार के लोग ही सबसे होशियार हैं? ये हम व्यवस्था बनाने चले हैं कि हर वो आदमी जो जमीन से जुड़ा है, जिसके पास जज्बा है, जिसमें काबिलियत है। पैसे के अभाव में, संसाधन के अभाव में, विश्वास के अभाव में किनारे कर दिया गया है। उसको साथ में मिलाएं और सभी मिलकर इस व्यवस्था को बनाएं।

मजबूत नहीं सही लोगों की तलाश

राजनीति में मजबूत को ही सही मान लिया जाता है कि यही आदमी चुनाव जीत सकता है। यही आदमी भीड़ जुटा सकता है और उसी के पीछे आदमी ताकत-शक्ति लगाता है। दल भी टिकट देता है कि वो जीतकर आए। ये जो पूरा अभियान है ये मजबूत लोगों को ढूंढने का अभियान नहीं है। यह अभियान है सही लोगों को ढूंढने का।इसके पीछे सोच यह है कि सही के पीछे ताकत, शक्ति, बुद्ध पैसा लगाकर उसे मजबूत बनाया जा सकता है। लेकिन मजबूत को जिता देंगे तो वो सही हो इस बात की कोई गारंटी नहीं है।

नेता के मन में डर पैदा करें : प्रशांत किशोर

तमिलनाडु में कर्नाटक में हर 5 वर्ष में नई सरकार, तभी नेता डरता है। काम नहीं करेंगे तो जनता हटा देगी। बिहार में जान ही रहा है कि काम करें चाहे नहीं, जाति पर ये लोग वोट आकर दे ही देंगे। जाएगा कहां रोकर चाहे गाकर। भाजपा के डर से लालू को और लालू के डर से भाजपा को वोट पड़ ही जाना है तो जब तक ये नेताओं के मन में डर नहीं पैदा कीजिएगा, तब तक आपका भला नहीं होगा।

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