बिहार : हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत मनाया जाता है. साल 2023 का आखिरी प्रदोष व्रत 24 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन रविवार होने के कारण साल का आखिरी प्रदोष व्रत काफी खास हो गया है. रविवार का दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत भी कहा गया है और इसे अनंग त्रयोदशी के नाम से भी जानते हैं. अगर आप इस दिन भगवान महादेव की पूजा अर्चना करेंगे तो आपका नया साल आपके लिए काफी बेहतर हो जाएगा. ज्योतिषाचार्य आचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि इस त्रयोदशी को अगर खास मुहूर्त में भगवान भोलेनाथ की पूजा की गई तो लोगों को इच्छित वरदान मिल सकता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है.

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत मनाया जाता है और इस महीने प्रदोष व्रत रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष भी कहा जा रहा है और यह अत्यंत शुभकारी होता है. आचार्य श्री झा ने बताया कि मार्गशीर्ष इस माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 24 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शुरू हो रहा है. इसका समापन 25 दिसंबर सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर होगा. उन्होंने कहा कि प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. ऐसे में 24 दिसंबर रविवार को प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी. उन्होंने बताया कि पूजा का शुभ मुहूर्त 24 दिसंबर शाम 5:30 से रात 8:14 तक रहेगा.

इस तरीके से करें महादेव की पूजा, पूरी होगी मनोकामना
शत्रुघ्न झा ने बताया कि प्रदोष व्रत पर भगवान महादेव की पूजा करने से हर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. उन्होंने कहा कि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान कर साफ वस्त्र पहनना चाहिए और मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद वहां एक दीप प्रज्वलित कर भगवान भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए. प्रदोष व्रत में पूजा का विधान गोधूलि बेला में किया जाता है. इस दिन भगवान भोलेनाथ को गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद भगवान भोलेनाथ को बिल्वपत्र, शमी के फूल और धतूरा अर्पित करें. इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती और गणेश जी की भी पूजा करनी चाहिए. प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ को घी और दही का भोग लगाना अत्यंत शुभकारी माना गया है. इस दिन भगवान भोलेनाथ के मंत्रों का जाप कर उसे प्रसाद को परिवार के साथ वितरित करें. ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है और भगवान भोलेनाथ उन पर प्रश्न होते हैं.