खेती पर बदलने मौसम का असर, किसान अब नहीं कर पा रहें नक्षत्रों के अनुसार खेती

बिहार में मौसम में बदलाव का असर खेती पर भी दिखने लगा है। खरीफ फसलों की नर्सरी पर इसका खास असल पड़ रहा है। किसानों की नर्सरी 20 दिन देर से लग रही है। इसके कारण रोपनी में विलंब हो रहा है। पहले मौसम अनुकूल था। समय पर ठंड, गर्मी और बरसात हुआ करती थी। लेकिन मौमस का चक्र बदल जाने से किसान अब नक्षत्रों के अनुसार खेती नहीं कर पा रहे हैं।

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राज्य में खेती किसानी अभी भी मौसम और जलवायु पर आधारित है। किसान नक्षत्र के अनुसार समय से खेती करते थे। 25 मई से 8 जून के बीच रोहिणी नक्षत्र कहलाता है। इसमें अच्छी बारिश होती थी। किसान इस समय धान की नर्सरी, कपास और मक्के की बुआई करते थे। 9 जून से 22 जून तक मृगनिक्षरा (करूआटक) नक्षत्र में गर्मी तेज होती थी। इसमें किसान जैविक खाद खेत में डालते थे। खेत की मेड़ बनाकर धान रोपनी की तैयारी में जुट जाते थे। 22 जून से 8 जुलाई तक आद्रा नक्षत्र में बारिश जमकर होती थी। इसमें रोहिणी नक्षत्र के दिए गए धान की नर्सरी की रोपनी शुरू हो जाती थी। आद्रा नक्षत्र में भरपूर बारिश से वातावरण आद्र हो जाता तो किसान खीर-पूड़ी और आम का भोजन किया करते थे।

नौबतपुर के किसान अजय कुमार का कहना है कि अब मौसम पूरी तरह विपरीत हो चुका है। नक्षत्र के अनुसार ठंड, गर्मी और बरसात नहीं हो रही है। इसके कारण नर्सरी लगाने में 20 दिन और रोपनी-बुआई में एक महीने तक की देरी हो गई। किसानों की खेती अब बोरिंग के सहारे हो रही है। छोटे किसानों की परेशानी बढ़ गई। किसानों ने बताया कि बारिश समय से नहीं हो रही है। पानी का अभाव रहता है। सोयाबीन की खेती से फायदा भी हो रहा है।

मौसम में बदलाव से उत्पादन 40 कम हुआ

कृषि वैज्ञानिक गणेश राम ने बताया कि मौसम में बदलाव से उत्पादन में 40 प्रतिशत की कमी आ गई है। धान का प्रति एकड़ उत्पादन 20 क्विंटल की जगह 15 क्विंटल हो रहा है। पांच क्विंटल की कमी आई। गेहूं प्रति एकड़ उत्पादन 10 क्विंटल होना चाहिए और 7 क्विंटल हो रहा है। सरसों में प्रति एकड़ उत्पादन छह क्विंटल होना चाहिए और 3 क्विंटल हो रहा है। दलहन में चना में प्रति एकड़ उत्पादन 6 क्विंटल होना चाहिए और 3 क्विंटल हो रहा है। मसूर प्रति एकड़ उत्पादन 6 क्विंटल पर तीन से चार क्विंटल हो रहा है। अब खेती बोरिंग पर पूरी तरह निर्भर होती जा रही है। मौसम में बदलाव से धान की नर्सरी 20 दिन देर से लग रही है और गेहूं प्रति एकड़ उत्पादन 10 क्विंटल की जगह 7 क्विंटल हो रहा है

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