गयाा: तमिलनाडु में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम की ट्रैक साइकिलिंग स्पर्धा में गया के प्रहलाद कुमार ने रजत पदक हासिल किया है. 3 किलोमीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में प्रहलाद ने यह उपलब्धि हासिल की है. वह राज्य के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने खेलो इंडिया में पदक प्राप्त किया है. प्रह्लाद गया जिले के अतरी प्रखंड क्षेत्र के नरावट गांव के रहने वाले हैं. प्रहलाद की इस उपलब्धि पर घर परिवार में हर्ष का माहौल है. 17 जनवरी से 22 जनवरी तक तमिलनाडु में आयोजित प्रतियोगिता में यह उपलब्धि अपने नाम की है.

इससे पहले प्रहलाद नवंबर दिसंबर महीने में झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित राष्ट्रीय ट्रैक चैंपियनशिप के जूनियर बालक वर्ग के तीन किलोमीटर आइटीटी प्रसूत प्रतिस्पर्धा में 12 साल बाद बिहार को इस खेल में मेडल दिलाया था. प्रहलाद ने सिल्वर मेडल जीतकर जिले के साथ पूरे बिहार का नाम रोशन किया था. प्रहलाद एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनके पिताजी एक किसान हैं और माता गृहणी है. बचपन से ही प्रहलाद को साइकिलिंग में रुचि थी और घर पर रखे साइकिल से ही उसने इसे चलाना सीखा.
मां-पिता ने खेलने से किया मना
प्रहलाद 10वीं पास करने के बाद साइकिलिंग सीखने पटना चले गए. साइकिलिंग का प्रशिक्षण लिया. जिसके बाद दिल्ली जाकर विभिन्न कोच के गाइडेंस में साइकिल सीखी. इसके बाद कई चैंपियनशिप के लिए उनका चयन हुआ है. प्रहलाद की इस उपलब्धि पर घर परिवार तो खुश हैं ही अब इनका सपना है कि वह देश के लिए खेलते हुए एक अलग पहचान बनाकर देश का नाम रोशन करें. प्रहलाद ने बताया कि जब वह छोटा था तो घर की साइकिल लेकर निकल जाता था. इसके लिए उसे कई बार माता-पिता से डांट भी पड़ती थी कि पढ़ाई-लिखाई छोड़कर साइकिल चला रहा है, लेकिन हमारी रुचि इसी में बढ़ती गई. 10वीं के बाद पटना जाकर इसका प्रशिक्षण लिया और आज बिहार के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी
इस उपलब्धि में इनके फुफेरे भाई का भी अहम योगदान है. उन्होंने ही इसे साइकिलिंग के लिए प्रेरित किया. वह भी साइकिलिंग करते थे, लेकिन थोड़ा चूकने के कारण उनका चयन नहीं हो पाया था. इससे पहले प्रहलाद जून महीने में थाईलैंड में आयोजित एशियन ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. बिहार के इकलौते खिलाड़ी हैं जो इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके हैं. प्रहलाद को बचपन से ही साइकिलिंग में रुचि थी और घर पर रखी साइकिल से ही उसने इसे चलाना सीखा. 10वीं पास करने के बाद वह पटना चले गए और साइकिलिंग का प्रशिक्षण लिया. विभिन्न कोच के गाइडेंस में साइकिल सीखने के बाद दिल्ली गया और उसके बाद पटियाला में उनका चयन इस खेल में हुआ था.