पटना. बिहार में एक ओर राजनीतिक उथल पुथल है तो दूसरी ओर प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज है. शुक्रवार की रात कई आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया तो यह सामान्य खबर लगी. लेकिन, इसमें जब पटना डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह के स्थान पर शीर्षत कपिल अशोक को पटना का नया जिलाधिकारी बनाने की खबर आई तो इस को लेकर सवाल उठने लगे. दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, डॉ. चंद्रशेखर सिंह को जीविका का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बनाया गया है और विशेष सचिव मुख्यमंत्री का प्रभार भी दिया गया है. हालांकि, इसे शासकीय लिहाज से इसे उनका डिमोशन कहा जा रहा है. इसके साथ ही सवाल उठ रहा है कि क्या डॉ. चंद्रशेखर सिंह के साथ भी कोई खेल हो गया क्या? क्या शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक से टकराने के कारण उनको सबक दिया गया?

बता दें कि पटना डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के उस निर्देश को एक तरह से चुनौती दी थी जिसमें शीतलहर और ठंड में स्कूलों को बंद किए जाने को लेकर विभागीय पत्र जारी किया था. केके पाठक के अनुसार, जिलाधिकारी बिना शिक्षा विभाग के परामर्श के स्कूलों को बंद करने का निर्णय न लें. लेकिन इसके बाद पटना डीएम की ओर से एक पत्र जारी कर शीतलहर को देखते हुए स्कूलों को 23 जनवरी, तक बंद करने का आदेश दिया गया. इसके बाद यह तिथि फिर 25 जनवरी तक कर दी गई.

वहीं, पटना डीएम की ओर से यह भी कहा गया कि शिक्षा विभाग को सीआरपीसी का अध्ययन करना चाहिए. ये क्षेत्राधिकार जिला दंडाधिकारी को दिया गया है. बच्चों की जान की सुरक्षा को लेकर स्कूलों को बंद करना जरूरी होता है और इसलिए ऐसे आदेश दिए जाते हैं.

डीएम ने यह भी दावा किया था कि क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण शिक्षा विभाग को अधिकार नहीं है कि वो जिलाधिकारी के स्कूल बंद करने के फैसले को चुनौती दे. क्षेत्राधिकार के तहत डीएम को धारा 144 लगाने का अधिकार है. पटना डीएम ने शिक्षा विभाग को ये भी कहा कि वो लोग धारा का अध्ययन करें, ऐसा कुछ नहीं है. हमने आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग कर स्कूलों को बंद किया है.