बिहार में बड़े पैमाने पर बीपीएससी (BPSC) के द्वारा शिक्षकों की बहाली की गई है. टीआरई 1.0 तथा टीआरई 2.0 में चयनित शिक्षकों को विद्यालय भी अलॉट किया जा चुका है और उन्हें अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में विद्यालय में पदस्थापन के बाद तुरंत बाद ही बीपीएससी (BPSC) नियोजित शिक्षकों को एक जरूरी काम करने का भी निर्देश प्राप्त हुआ है. ऐसा नहीं करने से शिक्षकों के लिए मुश्किल हो सकती है. ऐसे में बीपीएससी (BPSC) शिक्षकों को यह जान लेना चाहिए कि यह काम करने के लिए उन्हें कौन-कौन से दस्तावेज की आवश्यकता होगी. दरअसल, बीपीएससी शिक्षकों को एनपीएस पोर्टल पर खुद से अपना प्राण (PRAN) जेनरेट करना होगा और शिक्षकों के प्राण शिफ्टिंग की प्रक्रिया एनएसडीएल की तरफ से किया जाएगा. सभी शिक्षकों को इसे जेनरेट करना जरूरी होगा.

क्या होता है PRAN नंबर और क्यों है जरूरी
परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) नेशनल पेंशन स्कीम सब्सक्राइबर को अलॉट किया जाने वाला यूनिक नंबर है. प्राण इंडिविजुअल सब्सक्राइबर टाइप एक पोर्टेबल अकाउंट है और इसको शिफ्ट किया जा सकता है. इसका मतलब कोई भी कर्मचारी अपने अकाउंट को प्राइवेट या सरकारी सेक्टर में शिफ्ट कर सकते हैं. इसको करने के लिए आईएसएस-1 फॉर्म भरना होता है. इसे डाउनलोड करें. इसपर अपना प्राण (PRAN) जेनरेट करने वाले सब्सक्राइबर को अपनी सैलरी और डिपार्टमेंट सहित रोजगार संबंधी दूसरे डिटेल देने होंगे.

प्राण जनरेट या शिफ्ट करने वाले शिक्षकों को छह तरह के दस्तावेज इसमें उपलब्ध कराने होंगे. शिक्षक सभी दस्तावेजों को डीपीओ स्थापना कार्यालय में जमा कराएंगे. डीईओ कपिल देव तिवारी ने बताया कि सभी शिक्षकों को जिला शिक्षा कार्यालय की तरफ से जारी किया गया रंगीन पत्र, योगदान पत्र, आधार कार्ड की छाया प्रति, पैन कार्ड की छाया प्रति, विद्यालय का पहचान पत्र तथा फोटो युक्त कैंसिल चेक प्रस्तुत करना होगा. इन सभी की रंगीन छाया प्रति लगानी होगी. डीपीओ कार्यालय में सभी दस्तावेज जमा होने के बाद इसे कोषागार कार्यालय भेजा जाएगा. शिक्षकों के लिए यह करना काफी जरूरी है. ऐसे में अगर आप भी बीपीएससी शिक्षक हैं तो आज ही यह काम कर लें अन्यथा आपके लिए मुश्किल हो सकती है.
