काराकाट लोकसभा सीट एक बार फिर चर्चा में, उपेंद्र कुशवाहा के लिए चुनौती बने पवन सिंह !

भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. आसनसोल से बीजेपी का टिकट लौटाने वाले इस अभिनेता जो कि पावर स्टार के नाम से जाना जाता है ने बिहार के काराकाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, इस कारण ये सीट एक बार फिर से चर्चा में है. भोजपुरी के पावर स्टार कहे जाने वाले पवन सिंह ने काराकाट सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा क्या की इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा होने लगी है.

पवन सिंह को काराकाट से निर्दलीय उतार बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को निबटा  दिया ! - Live Dainik - Latest & Live Breaking News in Hindi

पावर स्टार का क्रेज

पावर स्टार के नाम से चर्चित पवन सिंह की इलाके में खासी पहचान है. खासकर भोजपुरी इलाके में युवाओं में उनका क्रेज है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी इस बार फिर यहां से NDA के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने जा रहे हैं. जब उनसे पवन सिंह के चुनाव में खड़े होने की बात के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह विज्ञान के छात्र हैं, उनसे वाणिज्य का सवाल नहीं पूछा जाए. उन्होंने पवन सिंह के चुनाव में खड़े होने के सवाल पर कन्नी काट लिया. एनडीए गठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा को मात्र एक सीट मिली है, वहीं माले के राजाराम सिंह यहां INDI  गठबंधन के उम्मीदवार हैं जिसके बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है.

कुशवाहा जाति का दबदबा

काराकाट में इस बार 18 लाख 72 हजार से अधिक मतदाता अपने मतों का प्रयोग करेंगे. जातीय समीकरण की बात करें तो यह इलाका यादव तथा कुशवाहा बहुल है. वही सवर्ण एवं मुस्लिम वोटर की यहां अच्छी खासी संख्या है. अति पिछड़ा में मल्लाह की वोट काफी है. जो राजनीतिक समीकरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दलित-महादलित वोटर भी यहां निर्णायक भूमिका में होते हैं. इस सीट से कुशवाहा तथा यादव तथा राजपूत जाति के वोटर यहां अपनी अपनी राजनीतिक साधते रहे हैं. यही कारण है कि अब तक सिर्फ कुशवाहा समाज के लोग ही पिछले तीन लोकसभा चुनाव में यहां जीत दर्ज की है.

पवन सिंह के मैदान में आने से बदली सियासी समीकरण

काराकाट सीट पर सातवें चरण में अर्थात अंतिम चरण में मतदान होना है लेकिन अभी से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. इस इलाके में राजपूत जाति के लोगों की संख्या यहां अच्छी खासी है ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा को इस सीट पर दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

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