बिहार के विभिन्न जिलों में प्रचंड गर्मी का प्रकोप है. लोग गर्मी और लू से बचने के लिए धूप में घरों से बाहर तक नहीं निकल रहे हैं. ऐसे में बिहार का सरकारी स्कूल अपने समय को लेकर एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गया है. बिहार अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि जहां एक तरफ देश के सभी राज्यों में शिक्षक और बच्चे, दोनों को गर्मी की छुट्टी दी गई है, वहीं बिहार में सरकारी स्कूल खोल दिए गए हैं. उसपर भी स्कूल का समय इस तरह से रखा गया है कि शिक्षकों के साथ-साथ बच्चे भी छुट्टी में घर आते वक्त कड़ी धूप का सामना करने को मजबूर हैं.

बीमार हो रहे छात्र और शिक्षक
बिहार के तमाम शिक्षक सुबह 6:00 बजे से 1:30 तक के विद्यालयी कार्य का विरोध कर रहे हैं. शिक्षक सुबह 6:30 से 11:30 तक शैक्षणिक कार्य और 12:00 से पहले शिक्षकों की छुट्टी चाहते हैं. बच्चों की छुट्टी के बाद शिक्षकों की भी विद्यालय से छुट्टी हो जाती थी. लेकिन यह नया समय से शिक्षकों को और विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भी भारी कठिनाई हो रही है.

सुबह 6:00 बजे विद्यालय आने के लिए 5:00 बजे सुबह बच्चों को उठाने में अभिभावक भी परेशान हो रहे हैं. वहीं भूखे पेट शिक्षक घर से स्कूल आ रहे हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है. मुजफ्फरपुर में एक शिक्षक की लू से मौ’त भी हो गई है. वहीं गर्मी की छुट्टी में बच्चों के लिए समर कैंप लगाया जाता था, जिसमें बच्चे तरह-तरह की चीजें सीखते थे. लेकिन विभाग द्वारा गर्मी की छुट्टी में भी स्कूल खोलने से वे सब चीजें समाप्त हो गई हैं.
प्रताड़ित करने वाला फरमान
लोगों का कहना है कि विद्यालयों का यह समय संचालन शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी प्रताड़ित करने वाला है. यह सिर्फ शिक्षकों का ही मुद्दा नहीं है, बल्कि समाज के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है.

