पटना साहेब सीट पर कड़ी टक्कर, इन दो दिग्गज सियासी घरानों में घमासान!

राजधानी के चार शहरी और दो ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से बने पटना लोकसभा सीट पर कांग्रेस, वामदल और समाजवादियों का कब्जा रहा है। परिसीमन के बाद 2009 में पटना से पटना साहिब बनी इस सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा है। दो चुनावों (2009 व 2014) में भाजपा के टिकट पर सिने स्टार सह बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा ने बाजी मारी तो पिछले चुनाव (2019) में भाजपा के रविशंकर प्रसाद के हाथों कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे शत्रुघ्न सिन्हा को हार का सामना करना पड़ा।

 

एक बार फिर भाजपा के टिकट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मैदान में हैं। उनका मुकाबला लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार के बेटे डॉ अंशुल अविजित से है। दोनों ही उम्मीदवारों का ताल्लुक मशहूर राजनीतिक घरानों से है। इसलिए कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए पटना साहिब नाक की लड़ाई बन गई है। दोनों ही अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं और चुनाव प्रचार में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखी है। पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार रोड शो किया तो कांग्रेस भी राहुल गांधी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं का कार्यक्रम आयोजित करने में जुटी है।

पटना से पहले सांसद बने थे सारंगधर सिन्हा पूर्व के पटना संसदीय क्षेत्र से पहले सांसद कांग्रेस के सारंगधर सिन्हा बने थे। 1962 में क्षेत्र की पहली महिला सांसद बनीं रामदुलारी सिन्हा ने भी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद भाकपा के रामावतार शास्त्रत्त्ी ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली। शास्त्रत्त्ी तीन बार 1967, 1971 और 1980 में सांसद निर्वाचित हुए। इंदिरा विरोधी लहर के दौरान 1977 में यहां से जनता पार्टी के महामाया प्रसाद सिन्हा ने समाजवाद का परचम लहराया था। राज्य के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सीपी ठाकुर ने एक बार 1984 में कांग्रेस और दो बार 1996 तथा 1998 में भाजपा के टिकट पर यहां से बाजी मारी।

1984 के बाद से कांग्रेस नहीं जीती1984 के बाद यह समाजवादियों और भाजपा का गढ़ बन गया। 1987 में भाजपा के टिकट पर शिक्षाविद शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने बाजी मारी। रामकृपाल यादव 1993 और 1996 में जनता दल और 2004 में राजद के टिकट पर यहां से सांसद बने।

यहां के कई सांसद मंत्री बने यह सीट हमेशा से वीआईपी रही है। इस सीट के कई सांसद मंत्री भी बने। पहले सांसद सारंगधर सिन्हा संविधान सभा के सदस्य रहे थे। दूसरी सांसद रामदुलारी देवी भी केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल रही थीं। महामाया प्रसाद सिन्हा यहां से सांसद बनने से पहले मार्च 1967 से जनवरी 1968 तक बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके थे। यहां से सांसद चुने गए डॉ. सीपी ठाकुर, शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

    

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