पटना: किसी भी दिव्यांग बच्चे को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेने में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक सकारात्मक कदम उठाया है. अब प्राइवेट स्कूलों में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए 05 फीसदी सीटों को आरक्षित करने का निर्णय शिक्षा विभाग ने लिया है. इसके साथ ही स्कूल नहीं आने पर नाम काट देने वाले केके पाठक के आदेश को भी अब बदल दिया गया है. अब अनुपस्थित रहने पर विद्यार्थियों का नाम नहीं काटा जाएगा, बल्कि उसके स्कूल ना आने का कारण पता किया जाएगा. छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी सेविकाएं और जीविका दीदियों को दी गई है.
प्राइवेट स्कूलों में 5 फीसदी का आरक्षण
बिहार के किसी भी प्राइवेट स्कूल में कुल सीटों की तुलना में 5 फीसदी सीट दिव्यांग बच्चों के लिए रिजर्व रखा जाएगा. स्कूलों के आवंटन के लिए लॉटरी सिस्टम का उपयोग किया जाएगा. ऐसे दिव्यांग विद्यार्थी, जो इस रिजर्वेशन के तहत प्राइवेट विद्यालय में एडमिशन लेना चाहते हैं, उनके लिए विद्यालय का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा. नियमानुसार ऐसे छात्र-छात्राओं को डीईओ और डीपीओ अपने कार्यालय के माध्यम से विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से करेंगे. विद्यालय आवंटन के बाद अभिभावक आवेदन की हार्ड कॉपी और सभी दस्तावेज की छायाप्रति विद्यालय और बीईओ के पास जमा करेंगे. जबकि प्रधानाचार्य ऐसे बच्चों से उनसे दूरभाष या अन्य माध्यमों से संपर्क करेंगे.

नाम कटने के नियम में बदलाव
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अगर बच्चे लगातार स्कूल में अनुपस्थित हैं, तो उनका नाम काटने के बजाय उनके स्कूल नहीं आने का कारण पता किया जाएगा. यदि कोई बच्चा 3 दिनों तक लगातार स्कूल नहीं आता हैं, तो सम्बंधित प्रधान शिक्षक, वर्ग शिक्षक और टोला सेवक बच्चे के अभिभावक से संपर्क कर स्कूल नहीं आने का कारण जानेंगे और बच्चे को फिर से स्कूल भेजने के लिए अभिभावक को प्रोत्साहित करेगें. इसके साथ ही अब अपने-अपने पोषक क्षेत्र की आंगनबाड़ी सेविका और जीविका दीदी 6 से 14 वर्ष के आउट ऑफ स्कूली बच्चों को चिह्नित कर स्कूल तक पहुंचाएंगी. इसके अलावा विद्यालय में बच्चों के ड्रॉप आउट को रोकने के लिए अब मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच और विकास मित्र की भी मदद ली जाएगी.








