राज्य के सरकारी विद्यालयों की तर्ज पर अब करीब 40 हजार निजी स्कूलों के बच्चों की भी आधार सीडिंग होगी। इसे शिक्षा विभाग ने अनिवार्य कर दिया है। निजी विद्यालयों में 32 लाख 76 हजार 773 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से मात्र एक प्रतिशत बच्चों का ही आधार सीडिंग हुआ है। आधार सीडिंग से निजी विद्यालयों में नामांकित बच्चों का डाटा संग्रह करने में शिक्षा विभाग को मदद मिलेगी। यह डाटा केंद्र सरकार को भी भेजा जाएगा। अभी निजी विद्यालयों के कितने बच्चे पढ़ रहे हैं, इसका डाटा शिक्षा विभाग के पास नहीं है।

हाल में केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 के तहत निजी विद्यालयों के बच्चों के आंकड़े संग्रहित करने और उसकी रिपोर्ट देने को कहा है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक मिथिलेश मिश्र ने बताया कि आरटीई के तहत निजी विद्यालयों के बच्चों की आधार सीडिंग आवश्यक है।

इस संबंध में पूर्व में भी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया था। विभाग को मिली सूचना के मुताबिक निजी विद्यालयों केे मात्र एक प्रतिशत बच्चों का ही आधार सीडिंग हो पाया है।
इसलिए निजी विद्यालयों के बच्चों के लिए आधार कार्ड बनवाने और उसकी सीडिंग अनिवार्य कर दिया गया है। निजी विद्यालयों में 26 प्रतिशत बच्चों के ही आधार कार्ड बने हैं। आधार सीडिंग से सरकारी और निजी विद्यालयों में दोहरे नामांकन वाले वैसे बच्चे पकड़ में आएंगे, जो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने हेतु नामांकन लेते हैं।

सरकारी विद्यालयों में 76 प्रतिशत बच्चों के बने आधार कार्ड
उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के आधार कार्ड बनवाने का अभियान जारी है। अब तक 76 प्रतिशत बच्चों के आधार कार्ड बन गए है। ऐसे बच्चों की आधार सीडिंग शिक्षा विभाग के पोर्टल पर करायी जा रही है। बच्चों केे आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रत्येक प्रखंड में दो आधार केंद्र खोले गए हैं। राज्य के 77,370 विद्यालयों में नामांकित एक करोड़ 84 लाख 36 हजार 388 बच्चों के आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं। इनमें से एक करोड़ 38 लाख बच्चों के आधार कार्ड बन चुके हैं।
