बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। दरअसल, सीतामढ़ी जिले में चार सालों से बंद पड़े रीगा चीनी मिल के फिर से चालू होने की उम्मीद जगी है। इस मिल के बंद हो जाने से क्षेत्र के हजारों किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो चुकी है। वहीं अब तक तीन बार इस इसकी नीलामी की प्रक्रिया भी शुरु की गई थी, लेकिन कई कारणों से नीलामी कार्य पूरी नहीं हुई।

वहीं जानकारी अनुसार दो दिन पूर्व बंगलोर की एक टीम रीगा चीनी मिल का निरीक्षण कर लौटी है। यह टीम रीगा मिल को नीलामी में लेने के लिए प्रबल दावेदार है। निरीक्षण के उपरांत टीम की संतुष्टि से यह उम्मीद जगी है कि रीगा चीनी मिल चालू होगा और लोगों के आर्थिक हालात बदलेंगे। मे. निरानी शुगर, बेंगलुरु के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एस निरानी की अगुवाई में सात सदस्यीय टीम रीगा चीनी मिल एवं डिस्टिलरी के हर मशीन की बारीकी से मुआयना की।

स्थानीय कर्मचारी और अपने तकनीकी अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने मिल के बाहरी क्षेत्र के उन निजी जमीनों को भी देखा, जिसे जरूरत पड़ने पर खरीदी की जा सके। फर्टिलाइजर यूनिट और को-जेनरेशन के साथ सारे बड़े-बड़े बंगले एवं कर्मियों के क्वार्टर को भी देखा।

अधिकारियों ने रीगा चीनी मिल के गोपालपुर फॉर्म, महादेव फॉर्म की जमीन के अलावा मुबारकपुर, रूसूलपुर, हरपुर और डुमरी के साथ ही रास्ते में पड़ने वाले गांवों के खेतों में लगे गन्ना को भी देखा एवं गन्ना किसानों से बातचीत की। टीम ने किसानों से जाना कि अगर मिल चालू होगा तो गन्ना की खेती कितनी बढ़ेगी।

इसी दौरान टीम की मुलाकात ‘रीगा चीनी मिल चालू करो’ अभियानी संगठन ईंखोत्पादक संघ के अध्यक्ष एवं ईंख काश्तकार संघ के महासचिव नागेंद्र प्रसाद सिंह से हुई। इस दौरान एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने नागेंद्र प्रसाद सिंह से उन सारी परिस्थितियों की जानकारी लेनी चाही, जिसके कारण मिल बंद हो गया और उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए किसानों का किस तरह का सहयोग मिल पाएगा।