समस्तीपुर में बंगाली प्रथा से मां दुर्गा की हुई विदाई

आयोजन की अध्यक्ष मंदिर पलीत ने बताया कि बंगाली समाज में सिंदूर का विशेष महत्व है। दशमी के दिन मां दुर्गा को बेटी की तरह विदा किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे एक बेटी को मायके से विदाई दी जाती है।

समस्तीपुर शहर के दुर्गाबाड़ी प्रांगण में शनिवार को बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन कर मां दुर्गा को विदाई दी।

विजयादशमी के मौके पर आयोजित इस रंगारंग कार्यक्रम में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में एक-दूसरे को सिंदूर लगाते हुए नजर आईं।

मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने सिंदूर दान कर मां को सम्मानपूर्वक विदा किया। फिर एक-दूसरे के साथ सिंदूर की होली खेली।

इस अवसर पर नाच-गाने के साथ मां दुर्गा से अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण भी दिया गया।

बंगाली परंपरा और सिंदूर खेला का महत्व

इस आयोजन की अध्यक्ष मंदिर पलीत ने बताया कि बंगाली समाज में सिंदूर का विशेष महत्व है। दशमी के दिन मां दुर्गा को बेटी की तरह विदा किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे एक बेटी को मायके से विदाई दी जाती है।

सिंदूर का खेल, मां को शुभकामनाएं देते हुए किया जाता है, जिसमें महिलाएं आपस में सिंदूर लगाकर अपने वैवाहिक सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।

पलीत ने कहा कि आज जहां मां दुर्गा की विदाई का दुःख है, वहीं अगले वर्ष उनके जल्दी आने की खुशी भी है। हम मां से पूरे विश्व में शांति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

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