प्रकाश सिन्हा (संपादक) की कलम से।
मुज़फ़्फ़रपुर | शहर की प्रतिष्ठित संस्था चित्रगुप्त ऐसोसिएशन के आगामी चुनावों को लेकर इस बार माहौल कुछ अलग और खासा गर्म नज़र आ रहा है। वर्षों से एक ही नेतृत्व में चल रही कमेटी के खिलाफ अब युवा और नए उम्मीदवारों ने मोर्चा खोल दिया है।

चंदे और खर्चे को लेकर बड़ा आरोप, घोटाले की आशंका
नए उम्मीदवारों ने खुलकर आरोप लगाया है कि चित्रगुप्त पूजा के दौरान आए चंदे और उसके खर्च का ब्यौरा पूजा समिति की कमेटी ने अब तक ऐसोसिएशन के कोषाध्यक्ष को नहीं सौंपा है। इससे एक बड़े आर्थिक घोटाले की आशंका जताई जा रही है। समाज के कई सदस्य भी इस मुद्दे पर पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं।

नए सदस्यों को जोड़ने में अनिच्छा — साजिश या रणनीति?
वर्तमान कमेटी पर यह भी आरोप है कि संस्था में जानबूझकर नए मेंबरों को नहीं जोड़ा गया। आरोप है कि यह एक सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है ताकि कम सदस्य होने की स्थिति में मतदान पर नियंत्रण बना रहे और पुरानी कमेटी का वर्चस्व कायम रहे।

पोस्टों पर नये चेहरों की प्रबल संभावना
इन चुनावों में कायस्थ समाज में बदलाव की तेज़ हवा चल रही है। कई ऐसे पद हैं, जहाँ पुराने चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय प्रतिनिधियों को लाने की माँग तेज़ हो गई है। खासकर संगठन मंत्री पद पर मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे का होता जा रहा है। वहीं अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर मुकाबला फिलहाल एकतरफ़ा नज़र आ रहा है।

अकर्मण्यता बनाम सक्रियता: मुद्दे की लड़ाई
नए उम्मीदवार लगातार पुरानी कमेटी की अकर्मण्यता को समाज के सामने उजागर करने में लगे हुए हैं। उनके अनुसार, ऐसोसिएशन केवल एक वार्षिक आयोजन तक सिमटकर रह गई है, जबकि संस्था को समाज सेवा, बुजुर्गों की देखभाल, और युवाओं के जुड़ाव जैसे गंभीर मुद्दों पर काम करना चाहिए था।
वहीं, वर्तमान कमेटी के सदस्य अब अपनी कुर्सी बचाने की पुरज़ोर कोशिशों में जुट गए हैं और समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

समाज कर रहा है नेतृत्व परिवर्तन की अपेक्षा
इस बार के चुनावों को केवल संस्था के पदाधिकारी बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कायस्थ समाज की अपेक्षा है कि नई टीम पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक ज़िम्मेदारी के साथ कार्य करेगी।

क्या होगा नतीजा? एक नए युग की शुरुआत या फिर वही पुरानी कहानी!
मुज़फ़्फ़रपुर चित्रगुप्त ऐसोसिएशन का चुनाव इस बार केवल पदों की नहीं, बल्कि सोच और कार्यशैली की लड़ाई बन चुका है। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कायस्थ समाज किस दिशा में अपने नेतृत्व को ले जाना चाहता है।
“समाज अब सो रहा नहीं, बदलाव की दस्तक दे रहा है!”


