नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए बिहार के पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने सुनाया, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आर. महाधवन शामिल थे।

मुन्ना शुक्ला और उनके साथ दोषी माने गए मंदू तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सजा की समीक्षा और पुनर्विचार की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि उनके दावे में कोई नया आधार या ठोस कारण नहीं है, जिसके चलते सजा की समीक्षा की जाए।

गौरतलब है कि यह मामला 1998 में पटना में घटित हुआ था, जब तत्कालीन राजद नेता और बिहार सरकार में मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी गई थी। उन पर हमला तब हुआ था जब वे अस्पताल में इलाज के लिए गए थे। हमलावरों से हुई मुठभेड़ में एक हमलावर को मार गिराया गया था।
बृज बिहारी प्रसाद बिहार के प्रभावशाली नेता और पूर्व सांसद रमा देवी के पति थे। इस हत्या के पीछे शातिर अपराधी और माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला का भी नाम आया था। हत्या के बाद विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने मुन्ना शुक्ला को गिरफ्तार किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी मुन्ना शुक्ला और मंदू तिवारी को 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा, ताकि वे अपनी शेष उम्रकैद की सजा पूरी कर सकें। वहीं, पूर्व सांसद सुरजभान सिंह सहित पांच अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा गया, जिसमें उन्हें बरी कर दिया गया था।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगीन अपराधों में लिप्त प्रभावशाली लोगों को भी कानून के शिकंजे से नहीं बचाया जा सकता।






