पूर्णिया-डगरुआ. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डगरुआ में प्रसव कराने आई प्रसूता को झांसा देकर आशा प्राइवेट क्लीनिक ले जाती हैं और इस कारण जच्चा-बच्चा की जान पर बन आती है।
दो कमरे के इस निजी क्लीनिक में न तो बोर्ड लगा है और न ही ट्रेंड स्टाफ हैं। इस कारण बुधवार को यहां दो नवजात की मौत हो गई। इसके बाद कहा जाता है कि बच्चे की मौत मां के पेट में ही हो गई थी। रविवार को डगरुआ के इसी निजी क्लीनिक में परिजन आए और हंगामा करने लगे। बाद में किसी तरह समझा-बुझाकर उन्हें शांत किया गया।
डगरुआ बाजार में स्थित निजी क्लीनिक में जहां प्रसव कराया जाता है, वहां की स्थिति काफी गंभीर है। दो कमरे में क्लीनिक है, जिसमें दरवाजा तक नहीं है। लकड़ी की चौकी पर पर्दा डालकर प्रसव कराया जाता है। इमरजेंसी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उस पर मोटी रकम भी ली जाती है।
स्वास्थ्य केंद्र से दो सौ मीटर की दूरी पर निजी क्लिनिक
डगरुआ बाजार में ऐसे ही दो और अवैध क्लीनिक चल रहा है। पहला डगरुआ हॉस्पिटल में पदस्थापित डॉ. आरके सिंह, जो हॉस्पिटल से महज़ दो सौ मीटर की दूरी पर अपना निजी क्लिनिक चलाते हैं। उनकी पत्नी प्रसव कराती हैं। आशा के माध्यम से प्रसूताओं को यहां लाया जाता है।
एक साल पहले डगरुआ चनेन टौला के रहने वाली एक महिला का यहां प्रसव कराया गया, लेकिन प्रसव के दौरान बच्चे का हाथ टूटकर गिर गया। इस हाथ को वहीं पास की नाली से बरामद किया गया।
लोगों के हंगामे के बाद हाथ नाली से मिला था। बाद में परिजनों को 90 हजार रुपया देकर मामले को दबा दिया गया। डगरुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित डॉ. आरके सिंह ने कहा कि उनका निजी क्लिनिक है, जब उन्हें ड्यूटी से छुट्टी मिलती है, तब वे निजी क्लिनिक पर जाते हैं।
बच्चे की मौत पर परिजनों से कहते हैं कि पेट में ही नवजात की मौत हो गई थी
बुधवार को मजगमा पंचायत के कन्हरिया गांव निवासी मो. इजहार बेटी बेटी का प्रसव कराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डगरुआ ले गए। बुधवार सुबह दस बजे प्रसूता को एडमिट कराया गया। रात्रि के करीब 9 बजे महिला का दर्द बढ़ गया। परिजनों ने नर्स से कहा तो नर्स ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। यदि ऐसी परेशानी होगी तो पूर्णिया रेफर कर दिया जाएगा।
इस बीच एक आशा परिजनों को फुसलाने लगी कि अगर आप लोग यहां से जल्द किसी प्राइवेट क्लीनिक में गर्भवती को लेकर नहीं गए तो बच्चे और मां दोनों की जान पर खतरा हो सकता है। फिर स्वास्थ्य केंद्र से महिला को प्राइवेट क्लीनिक ले जाया गया।
प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई, जहां प्रसूता को भर्ती कराने से पहले दो हजार और बाद में 8 हजार रुपए लिया गया। इसी दिन एक अन्य गर्भवती महिला मीना खातून को भर्ती कराया गया, उसके भी बच्चे की मौत हो गई। मीना भी आशा के कहने पर ही क्लीनिक पर गई थी।
सीधी बात- सीएस को सौंपेंगे रिपोर्ट
सवाल : आशा के द्वारा लक्ष्य पूरा नहीं किया जाता है और प्रसूता को सरकारी अस्पताल में वह ले जाती हैं।
जबाब : प्रखंड से कई आशाकर्मियों की शिकायत आई है। जल्द ही वे ऐसे आशा का नाम सूचीबद्ध कर सीएस को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सौंपेंगे।
सवाल : एक साल पूर्व भी डगरुआ में ही एक आशा द्वारा फर्जी क्लिनिक चलाने की बात सामने आई थी। आशा पर कोई करवाई नहीं हुई?
जबाब : एक साल पूर्व स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने कार्रवाई की थी और आशा को चयन मुक्त के लिए सीएस को लिखा गया था। (आशा प्रबंधक राजेश कुमार, से हुई बातचीत।)
सूचना मिलने पर होगी करवाई
इस तरह की कोई सूचना उन्हें नहीं मिली है। यदि कोई सूचना मिलेगी तो टीम बनाकर छापेमारी की जाएगी। केएम पूर्वे , सीएस पूर्णिया