मुजफ्फरपुर: बिहार की सियासत में जुबान फिसलने का सिलसिला कोई नया वाकया नहीं है, मगर जब सियासतदान कानून के दायरे से बाहर जाकर ऐसी गुस्ताखी भरी जुबान का इस्तेमाल करते हैं, तो सरकार से लेकर लोगों तक सनसनी फैलना स्वाभाविक है। सूबे के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर हलके से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक मुन्ना यादव का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया के गलियारों में आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में उनकी बातचीत का लहजा और कड़े शब्द न सिर्फ सियासी गलियारों में भूचाल ला रहे हैं, बल्कि कानून के दायरे पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।

बेकाबू बोल और बेईमान नीयत का इल्जाम
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा और सुना जा सकता है कि मुन्ना यादव मोबाइल फोन पर किसी शख्स से मुखातिब हैं और उनके इर्द-गिर्द कुछ समर्थक भी मौजूद हैं। बातचीत के दौरान उनका गुस्सा सातवें आसमान पर है। वह सरेआम यह कहते सुने जा रहे हैं कि सरकार की तमाम योजनाएं सिर्फ और सिर्फ भाग्य के मारे गरीबों के लिए बनती हैं, लेकिन उनके पवित्र हिस्से पर डाका कौन डालता है? इस पर वह तल्ख और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए सीधे तौर पर अमीर तबके और मध्यम वर्ग को निशाना बनाते हैं। उनकी इस गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ टिप्पणी ने समाज के एक बड़े तबके को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सत्ता की मलाई
लोगों के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यह सुलग रहा है कि जब मुन्ना यादव खुद सत्ता की कुर्सी पर काबिज थे और मीनापुर के विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे थे, तब उन्हें गरीबों के हक और इन स्कीमों की बदहाली का ख्याल क्यों नहीं आया? क्या तब उन्हें गरीबों की फिक्र नहीं सताती थी? कुर्सी छिन जाने के बाद अचानक हमदर्द बनने का यह मुखौटा महज़ एक सियासी स्टंट है या अवाम को बरगलाने की कोई सोची-समझी साजिश? सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि जो लोग खुद सरकार के मजे ले चुके हैं, आज वही संरक्षक बनकर लोगों के जज्बातों से खेल रहे हैं।

तेजस्वी की मुहिम को करारा झटका
यह वाकया ऐसे वक्त में सामने आया है जब आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार ‘ए टू जेड’ (A to Z) यानी समाज के हर वर्ग को एक मंच पर लाने और सबको साथ लेकर चलने की सुहानी सियासत कर रहे हैं। तेजस्वी की इस मजबूत योजना से पार्टी का दायरा बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन ऐसे बेलगाम और बड़बोले नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयानात ने पार्टी के इस एजेंडे को तगड़ा झटका दिया है। एक तरफ पार्टी सबका साथ पाने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के ही नुमाइंदे अमीर और मध्यम वर्ग के खिलाफ जहर उगलकर दरारें चौड़ी कर रहे हैं।

बहरहाल, इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर सियासत की उस काली हकीकत को बेनकाब कर दिया है, जहां जुबान की फिसलनों के जरिए वोटों की फसल काटी जाती है। देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान इस मामले में क्या कदम उठाता है और इस सियासी बाजीगरी का आने वाले दिनों में क्या असर पड़ता है।
