42 करोड़ के आबकारी चालान घोटाले में एक और गिरफ्तारी

इंदौर. 42 करोड़ के आबकारी चालान घोटाला मामले में 20 हजार के फरार इनामी को क्राइम ब्रांच ने बुधवार को गिरफ्तारी लिया। फरारी के दौरान उसने अलग-अलग जगह नौकरी की। वर्तमान में वह झाबुआ में एक कंपनी में मैनेजर के रूप में काम कर रहा था। पिछले महीने ही क्राइम ब्रांच ने फरार शराब ठेकेदार अभिषेक शर्मा को पावागढ़ से गिरफ्तार किया था। इसके खिलाफ रावजी बाजार थाने में घोटाले के बाद धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था।

जितेंद्र दो करोड़ के हेरफेर में है अारोपी

क्राइम ब्रांच एएसपी अमरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि एक साल पहले आबकारी अधिकारियों ने शराब ठेकेदारों के द्वारा ट्रेजरी के तौजी चालानों में हेरफेर के बाद 42 करोड़ के राजस्व की चोरी का खुलासा किया था। इसमें सहायक आबकारी आयुक्त राजीव प्रसाद द्विवेदी की शिकायत पर शहर के 14 शराब ठेकेदारों के खिलाफ केस दर्ज हुए थे। बाद में इस घोटाले में कई आरोपी बढ़ते चले गए थे।

चौहान ने बताया कि सूचना मिली थी कि आरोपी जितेंद्र शिवरामे पिता प्रकाश शिवरामे निवासी सुखलिया इंदौर, झाबुआ में फरारी काट रहा है। टीम ने उसे झाबुआ से गिरफ्तार किया। शिवरामे सालभर से फरार चल रहा था। उस पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित था। वह मुख्य अारोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी का साथी है। उस पर सिमरोल और चोरल की शराब दुकानों पर दो करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है।

आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह झाबुआ में बी 4 इओज सिनेमा में मैनेजर के पद था। पापा कांट्रेक्ट पर प्रिटिंग मशीन रिपेयरिंग का काम करते हैं। पॉलीटेक्निक की पढ़ाई के बाद उसने अलग-अलग जगह पर नौकरी की। राजू दशवंत से उसकी मुलाकात 2010 में हुई थी, यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई। उसने बताया कि राजू ने उसे बताया था कि वह शराब दुकान में सेल्समैन का काम करता है।

2014-15 में राजू ने बताया कि वह शराब का टेंडर डाल रहा हूं, लेकिन इसमें एक दिक्कत है। मैं नौकरी करता हूं, इसलिए मैं टेंडर नहीं डाल सकता। इसलिए तुम आने डाक्यूमेंट मुझे दे दे, तेरे नाम से ठेका ले लेता हूं। इस पर मैंने उसे कागजात दे दिए। इसके बाद इन्हें सिमरोल और चोरल का ठेका मिल गया।

ठेका मिलने के बाद राजू ने जितेंद्र के नाम से दो बैंक अकाउंट भी ओपन करवाए, जिसमें शराब दुकान के रुपयों का लेन-देन होता था। जितेंद्र ने बताया कि राजू उसे तीन हजार रुपए महीने देता था। राजू ने ही टेंडर के रुपए भी भरे थे। उसके नाम से ठेका जरूर था, लेकिन राजू ही दुकान से संबंधित पूरा काम देखता था। शराब दुकान को राजू गैर कानूनी ढंग से संचालित करता था।

पिछले महीने ही पकड़ाया था एक साथी

क्राइम ब्रांच ने पिछले महीने ही केस से जुड़े फरार शराब ठेकेदार अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया था। ये कई दिनों से गुजरात में फरारी काट रहा था। इसे लेकर पावागढ़ में सूचना मिली थी कि वह परिवार के साथ दर्शन के लिए गया है। वहां घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया था।

शिमरामे को इस मिलाकर अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं गिरोह का सरगना अंश त्रिवेदी के मददगार मिक्की उर्फ मृगांक पावेचा, उसका जनरल मैनेजर कैलाश माली और ड्राइवर अमजद को सांठ-गांठ के चलते पुलिस गिरफ्तार ही नहीं कर सकी है।

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