
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : पारू थानाअंतर्गत सरमस्तपुर ग्यासपुर के पश्चिमी दियारे में अवैध शराब फैक्ट्री संचालन मामले में फरार चल रहे पारू थाना क्षेत्रांतर्गत फंदा गाँव निवासी शराब माफिया संदीप सिंह को गिरफ्तार करने में जिला पुलिस ने सफलता हासिल कर ली है. वरीय पुलिस अधीक्षक ने गिरफ़्तारी की पुष्टि की है. रविवार देर रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी की पारू थाना क्षेत्र के ग्यासपुर दियारा इलाके में शराब माफिया संदीप सिंह हथियार के साथ छुपा है. वरीय पुलिस अधीक्षक को इसकी जानकारी दी गयी. जिसके उपरांत एसडीपीओ डॉ. शंकर झा के नेतृत्व में सरैया थानाध्यक्ष पुअनि राजू कुमार, पारू थानाध्यक्ष पुअनि श्रीचरण राम और सशस्त्र पुलिस बल को शामिल कर पुलिस टीम गठित कर सूचना के आलोक में चिन्हित स्थल की घेराबंदी कर छापेमारी की गयी. छापेमारी के दौरान सुप्तावस्था में संदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया. हालाँकि कोई हथियार बरामद नहीं किया जा सका.

शराब माफिया की गिरफ़्तारी से अवैध शराब कारोबार से जुड़े कई सफेदपोश और चर्चित चेहरों के बेनकाब होने की सम्भावना जताई जा रही है. पुलिस टीम संदीप सिंह के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है, जिससे शराब कारोबार में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्रमाण मिलने पर आरोपित बनाते हुए कार्रवाई की जा सके. बताया जाता है की पारु के फंदा गांव निवासी स्व. फुलगेन्द्र सिंह का पुत्र कुख्यात शराब माफिया संदीप सिंह कई वर्षों से अवैध शराब के धंधे में लिप्त है, साथ ही उसपर पारू में आर्म्स एक्ट समेत मद्य निषेध अधिनियम के तहत नौ और सरैया थाना में एक मामला दर्ज है. अवैध शराब के कारोबार में संदीप सिंह का नेटवर्क काफी बड़ा माना जाता है और इस कार्य में उसके पूरे परिवार की भी संलिप्तता बताई जाती है. जानकारी के अनुसार संदीप सिंह ने अवैध कमाई से काफी रुपये-संपत्ति भी अर्जित की है. शराब तस्करी, अवैध शराब की फैक्ट्री चलाने के साथ ही उस पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं. संदीप सिंह का काफी पुराना पुलिस रिकॉर्ड रहा है. पूर्व में आर्थिक अपराध कोषांग को संदीप सिंह के खिलाफ शराब कारोबार से अर्जित सम्पत्तियों की जांच की जिम्मेवारी भी सौंपी गयी थी, पर संदीप सिंह की ऊँची पहुँच-पैरवी और रसूख की बदौलत अब तक न तो जांच ही हो पायी न कोई कार्रवाई. यहाँ तक की जिला प्रशासन अंकुश तक लगा पाने में सफल नहीं हो सकी है.

गत 22 फरवरी 2019 को सरैया एसडीपीओ डॉ. शंकर झा के नेतृत्व में चार थानों की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा पारू थाना क्षेत्रान्तर्गत सरमस्तपुर गाँव के पश्चिमी दियारा गंडक नदी के किनारे 4 किलोमीटर अंदर जंगलों में बेखौफ चल रहे शराब माफिया संदीप सिंह के एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में स्थापित अवैध शराब फैक्ट्री का भड़ाफोड़ करते हुए 24 घंटे तक लगातार छापेमारी कर 17000 लीटर अवैध नकली विदेशी शराब और शराब बनाने की मशीन सहित, 40 ड्रामो में रखे 8000 लीटर स्पिरिट, सप्लाई हेतु सीलबंद बोतलों में तैयार शराब समेत, इम्पीरियल ब्लू और रॉयल स्टैग ब्रांड के रैपर, कॉर्क, नकली सरकारी थ्रीडी सील, 52 बोरी जिप्सम प्लास्टर (पुट्टी), शराब की हजारों खाली बोतलें, खाली कार्टून, सामान बरामद किया था. संदेह के आधार पर जेसीबी मशीन की मदद से दियारा इलाके में जगह-जगह खुदाई करवा कर भारी मात्रा में स्पिरिट भरे ड्राम और तैयार अवैध शराब बरामद किया गया था. बताया जाता है की कार्रवाई के दौरान लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य के अवैध नकली शराब की बरामदगी की गयी थी.

इस मामले में मुख्य धंधेबाज़ संदीप सिंह समेत 13 लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी. जिसमें मुख्य कारोबारी संदीप सिंह समेत उसके भाई दिवाकर सिंह, छपरा निवासी दामाद दिलीप सिंह, पारू के साहनी टोला निवासी अजय साहनी, सरमस्तपुर निवासी अरुण राय, पारू थानांतर्गत चिन्तामनपुर निवासी नीरज कुमार उर्फ़ गब्बर, राधू राय और अभय राय, सारण जिला के तरैया थाना स्थित भलुआ नकटा के सुरेश राय और लोकचथ राय, भलुआ शंकरडीह निवासी प्रीतम राय, तरैया थाना के भसपट्टी निवासी अर्जुन सिंह, हरखपुर निवासी राजकुमार सिंह शामिल हैं.

उक्त सभी आरोपियों पर अवैध शराब निर्माण कर मुजफ्फरपुर, सारण और उसके आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रो में बेचने का आरोप है.
इतने बड़े पैमाने पर पुलिस प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर व विगत कई वर्षों से अवैध शराब की फैक्ट्री का संचालन बिना प्रशासनिक और स्थानीय पुलिस के मिलीभगत के असंभव सी लगने वाली बात है. इस मामले में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत की बात भी सामने आयी थी. सूत्र ने बताया था की दियारे में अवैध शराब फ़ैक्ट्री संचालन की जानकारी स्थानीय चौकीदार द्वारा पुलिस को दी गयी थी, पर इसके बावजूद कोई करवाई नहीं की गई.

वर्ष 2016 में भी सरैया में पुलिस द्वारा एक शराब से भरी कन्टेनर जप्त की गयी थी जिसमे संदीप सिंह नामजद आरोपी है, और जेल की हवा खा चुका है. उस मामले में छानबीन के दौरान पटना के एक बड़े व्यवसायी का नाम प्रकाश में आया था, जो अवैध शराब की खेप मंगाने के लिए संदीप सिंह को फंडिंग की व्यवस्था करता था और संदीप सिंह का सहयोगी और करीबी बताया जाता है. गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर पटना से 60 लाख रुपयों के साथ उसकी गिरफ़्तारी की गयी थी. साथ ही एक और मामला जो संदीप सिंह के भाई से जुड़ा बताया जाता है, जो जून 2017 का है. वैशाली में अवैध शराब के साथ संदीप के भाई को एक चौकीदार ने पकड़ लिया था, जिस दौरान उक्त चौकीदार की हत्या कर दी गयी थी, जिसमें संदीप सिंह का भी नाम आया था. हालाँकि इस मामले में संदीप के भाई को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया था.
