वर्ष 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 20 प्रदूषित शहरों में 3 बिहार के हैं। राजधानी पटना की हवा दिल्ली से भी खराब है। गया और मुजफ्फरपुर में भी हवा का प्रदूषण ख’तरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार पटना दुनिया में 7वां सबसे प्रदूषित शहर है। वहीं मुजफ्फरपुर 13वें और गया 18वें नंबर पर है। पिछले दिनों पटना हाईकोर्ट ने भी बिहार सरकार को फ’टकार लगाते हुए कहा था कि राजधानी की हवा इतनी खराब और सरकार इसपर कोई एक्शन नहीं ले रही है।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद बिहार सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए बिहार में 15 साल से चल रहे पुराने वाहनों को परमिट नहीं देने का फैसला किया था। बकायदा बिहार के सभी जिलों में इसको लेकर चेकिंग अभियान भी चलाया गया। पटना में प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए सरकार ने सीएनजी गाड़ियां भी शुरू की। लेकिन, सभी जगहों पर सीएनजी की उपलब्धता न होने के चलते ज्यादातर गाड़ियां पेट्रोल और डीजल पर ही चलती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक हवा प्रदूषण के चलते बिहार में हर साल 96,977 लोगों की मौत होती है। इस मामले में बिहार का स्थान देश में तीसरा है। 2,60,028 के आंकड़े साथ उत्तरप्रदेश पहले और 1,08,038 के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। बिहार में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण गाड़ियां हैं। पेड़ों की कमी के चलते हवा शुद्ध नहीं हो पाती। भारत का 21.54 फीसदा भू-भाग वन अच्छादित है जबकि बिहार में यह महज 7.27 प्रतिशत है। बिहार के जंगल का ज्यादातर हिस्सा पश्चिमी चंपारण, कैमूर, जमुई, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, नवादा, नालंदा, मुंगेर, बांका और जमुई में है।
वायु प्रदूषण को कंट्रोल के लिए जहां दूसरे राज्य की सरकारों ने ई-व्हीकल को ज्यादा बढ़ावा दिया वहीं बिहार इस मामले में भी फिसड्डी है। ई-व्हीकल को बढ़ावा देने के मामले में महाराष्ट्र टॉप पर है। दूसरे नंबर पर गुजरात और तीसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश है। बिहार इस मामले में टॉप 10 से बाहर है।

डॉक्टर दिवाकर तेजस्वी ने बताया कि प्रदूषण से बचने के लिए हर व्यक्ति अपने घर आसपास एक पेड़ जरूर लगाए। घरों में इंडोर प्लांट और टैरेस गार्डनिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है। चूंकि, शहरों में जमीन काफी काम है इसलिए टैरेस गार्डनिंग प्रदूषण को कम में सहायक है और इससे घर में गर्मी भी कम लगती है। उन्होंने बताया कि बिहार के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में बैट्रीजेनिक कार और सीएनजी मॉडल की गाड़ियों को बढ़ावा मिले। दिल्ली में सीएनजी मॉडल सरकार का टेस्टेड मॉडल है।
इसके अलावा डॉ. दिवाकर ने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि कूड़ा ले जाने वाली गाड़ियां कवर्ड हो। लोग मेन रोड पर जाएं तो मास्क का इस्तेमाल करें। कंस्ट्रक्शन वाले जगहों को भी कवर किया जाना चाहिए।