MUZAFFARPUR : अहियापुर के नवनियुक्त थानाध्यक्ष मद्य निषेध मामलों के आ’रोपी! 2018 से दस वर्षों तक थानाध्यक्ष बनने पर थी रोक

MUZAFFARPIR (ARUN KUMAR) : मुजफ्फरपुर जिला के सर्वाधिक अप’राध प्रभावित क्षेत्र घोषित अहियापुर के थानाध्यक्ष सोना प्रसाद सिंह को अप’राध नि’यंत्रण में विफल पाते हुए तिरहुत जोन के डीआईजी रविन्द्र कुमार ने गत् गुरुवार को तत्काल प्रभाव से नि’लंबित कर दिया था. निलंबन के बाद से ही पुलिस कप्तान अहियापुर थाना की जिम्मेवारी किसी तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी को देना चाह रहे थे.

इस दौरान डीआईयू, एसआईटी और सर्विलांस के प्रभारी संजीव शेखर झा को अहियापुर की कमान सौंपी गयी है. जिले का सर्वाधिक अप’राधग्रस्त घोषित इलाका अहियापुर थानाध्यक्ष के पद पर बैठना पुलिस पदाधिकारियों को कांटो का ताज पहनना सरीखा प्रतीत हो रहा था, जिसे कोई नहीं लेना चाहता था, पर इसे चुनौती के रुप में स्वीकारा संजीव शेखर झा ने.

जानकारी के अनुसार नवनियुक्त थानाध्यक्ष का कार्यकाल भी विवादों से से घिरा रहा है. पटना के तत्कालीन जोनल आईजी नैय्यर हसनैन खान ने श’राब से जुड़े एक मामले में निर्दोष महिला को गलत फंसाने, छोड़ने के एवज में रिश्वत स्वरूप मोटी रकम मांगने, दो दिनों तक अ’वैध रूप से पुलिस हिरा’सत में रखने एवं बिना आरोप के जे’ल भेजने हेतु कोर्ट में प्रस्तुत करने के आरोप में तत्कालीन पाटलीपुत्रा, इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा को जून 2018 में निलंबित कर दिया था एवं अगले दस वर्षों तक थानेदार पद से मुक्त रखने का भी निर्देश जारी किया था. जिन्हें वर्तमान में अहियापुर थाना का थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

सवाल यह है कि तत्कालीन जोनल आईजी के आदेश की अनदेखी कर आखिर किस परिस्थितियों में एक कथित आ’रोपी पदाधिकारी को एक महत्वपूर्ण पद पर प्रतिनियुक्ति की गई यह जां’च का विषय है. मामले में पटना मुख्यालय आईजी नैय्यर हसनैन खान ने संज्ञान लिया और आश्चर्य व्यक्त करते हुये कहा कि मामले में तिरहुत जोन के जोनल आईजी से जांच के आदेश दिये जायेंगे, कि आखिर एक दा’गी पदाधिकारी को महत्वपूर्ण पद की जि’म्मेवारी कैसे और किन परिस्थितियों में सौंपी गई है.

जानकारी के अनुसार उक्त मामले में वर्ष 2017 में पाटलीपुत्रा थाना क्षेत्र के केशरीनगर की रहने वाली महिला नीतू कुमारी ने पुलिस मुख्यालय से लेकर पटना के तत्कालीन जोनल आईजी नैय्यर हसनैन से इसकी लिखित शिकायत थी. महिला की शिकायत को गम्भी’रतापूर्वक लेते हुए पटना के तत्कालीन जोनल आईजी नैय्यर हसनैन खान ने पटना एसएसपी मनु महाराज से 24 घंटे के अंदर जांच कर रिपोर्ट तलब की थी.

महिला ने जोनल आईजी से शिकायत करते हुए तत्कालीन पाटलिपुत्रा थानाध्यक्ष संजीव शेखर झा पर आरोप लगाते हुए कहा था की पाटलीपुत्रा कांड संख्या 156 /17 शराब से जुड़े मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा ने रात में फोन कर बुलाया और लगातार दो दिनों तक हिरासत में रखा. उन्हें छोड़ने के लिए रि’श्वत स्वरूप मोटी रकम की मांग की. जब रकम देने में अस्मर्थता जताई तो जेल भेजने के लिए न्यायिक हिरा’सत में न्यायालय भेज दिया गया. कोर्ट ने आरोप नहीं पाकर आ’रोपमुक्त कर दिया. तब जाकर इ’ज्जत बच सकी. उक्त महिला ने जोनल आईजी के समक्ष लिखित आरोप सहित कई सा’क्ष्य भी प्रस्तुत किये थे.

एसएसपी मनु महाराज ने महिला द्वारा लगाई गयी तीन आ’रोपों को सही पाया था. एसएसपी द्वारा जांच रिपोर्ट में बताया गया था की उक्त आ’रोपी इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा ने महिला को रात में फोन कर बुलाया और अवैध तरीके से हिरासत में रखा. एफआईआर में गलत अभियुक्त बनाया और आरोप नहीं रहते हुये भी जे’ल भेजने के लिए को’र्ट भेजा. वही इस मामले की जानकारी वरीय पुलिस पदाधिकारियों को नहीं दी गयी और सा’जिश के तहत छिपा कर रखा गया. एसएसपी मनु महाराज द्वारा जांच के दौरान यह भी सही पाया गया की कोर्ट ने उक्त महिला और उनके ड्राइवर को सा’क्ष्य के अभाव में मुक्त कर दिया था.

एसएसपी मनु महाराज की जांच रिपोर्ट आने के बाद जून 2018 में पटना के जोनल आईजी नैय्यर हसनैन खान ने आ’रोपी इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए मद्धनि’षेध का’नून के तहत अगले 10 वर्षों तक थानेदार पद से मुक्त रखने का निर्देश भी जारी किया था. इस पुरे मामले से पुलिस मुख्यालय को भी अवगत कराया गया था. वहीं आईजी श्री खान ने पटना के एसएसपी से तीन दिनों के अंदर आ’रोपी इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने का निर्देश देते हुये उक्त कांड संख्या 156/17 का जांच स्वयं एसएसपी से करने के आदेश पारित किये थे.

मामले के आ’रोपी इंस्पेक्टर संजीव शेखर झा उस वक़्त मुजफ्फरपुर जिले के काजीमुहम्मदपुर थाना में थानाध्यक्ष के पद पर पदस्थापित थें. आईजी नैय्यर हसनैन खान ने कार्रवाई की प्रति मद्धनि’षेध विभाग के आईजी, मुजफ्फरपुर आईजी, डीआईजी, एसएसपी एवं पटना के डीआईजी, एसएसपी को प्रेषित किया था.

जोनल आईजी नैय्यर हसनैन खान के अनुसार- श’राब से जुड़े मामले में कोई लाप’रवाही कदापि ब’र्दाश्त नहीं की जायेगी. यह जरूर ख्याल रखें की किसी निर्दो’ष को नहीं फं’साया जाये. इससे जनता की नज़रों में पुलिस की छवि धू’मिल होती हैं.

दा’गी पुलिस पदाधिकारी को अहियापुर थानाध्यक्ष बनाये जाने के मामले में तिरहुत जोन के जोनल आईजी गणेश कुमार ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुये कहा कि थानाध्यक्ष की नियुक्त एसपी/एसएसपी के अधीन होती है. उन्होंने पूरे मामले से अवगत होते हुये कहा कि इस तरह के गं’भीर मामले में शीघ्र जांच कर दो’षी के विरुद्ध अनुशा’सनिक का’र्रवाई की जायेगी. वहीं मामले में जिले के एसएसपी से सम्पर्क करने का दो बार प्रयास किया गया पर, कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.

इससे पूर्व एक मामले में पाटलिपुत्रा थाना क्षेत्र के एनटीपीसी के सीनियर सेक्रेटरी कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव के घर में 20 फरवरी को चो’री हुई थी. करीब 12 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति शा’तिर चो’रों ने चु’रा ली थी. इस मामले में पाटलिपुत्रा थाना में एफआ’ईआर भी द’र्ज कराई गई थी. उस वक्त संजीव शेखर झा ने एफआ’ईआर नंबर 59/17 दर्ज किया था. जून 2017 को जब पीडित कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव थाने जाकर केस की जानकारी मांगी तो चौंक गए. उस वक्त मौजूद पुलिस पदाधिकारी ने जांच कर बताया कि एफआ’ईआर नंबर 59/17 में तो चो’री की जगह कोई दूसरा मामला दर्ज है.

जून माह में मामले की जानकारी एसएसपी मनु महाराज को हुई. एसएसपी के आदेश पर मामले की जां’च की गई. तब तक पाटलिपुत्रा के थानेदार बदल चुके थे. पाटलिपुत्रा थाना की जिम्मेवारी टीएन तिवारी को मिल गई थी. मामले की जां’च की गई और आरोप सही पाया गया. इसके बाद चोरी की एफआ’ईआर दर्ज की गई. इस मामले में एसएसपी ने डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. मो. शिब्ली नोमानी से रि’पोर्ट भी तलब की गई थी.

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