उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा ‘स्कूलों में विद्यार्थियों को किसी तरह का निर्देश देने के लिए मातृ भाषा को ही माध्यम बनाया जाना चाहिए। कम से कम प्राथमिक स्तर पर तो ऐसा जरूर होना चाहिए।’उन्होंने आगे कहा कि ‘भाषा को हमें आपस में जोड़ने का माध्यम बनाया जाना चाहिए, न कि तोड़ने का। किसी भी भाषा को न तो थोपा जाना चाहिए और न ही उसका विरोध किया जाए।
उप राष्ट्रपति नायडू मैसूर में आयोजित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज के स्वर्ण जयंती समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समय आ चुका है जब हम देश में भाषा की शिक्षा के बारे में सोचें और इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएं।

वैश्विक स्तर के अध्ययनों की बात करते हुए नायडू ने कहा कि शिक्षा के शुरुआती दिनों में बच्चों को मातृ भाषा सिखाने से उनका मानसिक विकास तेज और बेहतर होता है। इससे बच्चों की रचनात्मक और तार्किक क्षमता भी बढ़ती है।
नायडू ने यह भी कहा कि लोग गर्व और सम्मान के साथ अपनी मातृ भाषा बोलें और लिखें।
