MUZAFFARPUR : बकरी चराने गई दो बच्चियाँ डू’बीं, एक को बचाया, दूसरी की तलाश जारी, एसडीआरएफ टीम के न पहुँचने से आ’क्रोश

MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : अहियापुर में सोमवार की सुबह बकरी चराने गई 2 बच्चियां डू’ब गयीं. स्थानीय लोगों के प्रयास से एक बच्ची को ब’चा लिया गया. वहीं पुलिस की मौजूदगी में गोताखो’रों द्वारा दूसरी बच्ची की देर शाम तक तला’श की गई पर सफ’लता नहीं मिली. दोनों बच्चियों की पहचान गाँव के ही अर्जुन सहनी की 8 वर्षीय पुत्री सुहानी कुमारी और रंजीत सहनी की 10 वर्षीय पुत्री सिमरन कुमारी के रूप में हुई है. वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एसडीआरएफ/एनडीआरएफ टीम के न पहुँचने से स्थानीय लोगों के बीच आ’क्रोश व्या’प्त था.

जानकारी के अनुसार अहियापुर थाना क्षेत्र के कोल्हुआ पैगंबरपुर में सोमवार की सुबह बकरी चराने गयी दो बच्चियां डू’ब गई. स्थानीय लोगों की तत्प’रता से रंजीत सहनी की पुत्री सिमरन को बचा लिया गया. सिमरन को बे’होशी की हा’लत में इ’लाज के लिए बैरिया स्थित एक निजी अस्प’ताल में भ’र्ती कराया गया है, जहां उसका इ’लाज चल रहा है.

वहीं अर्जुन सहनी की 8 वर्षीय पुत्री सुहानी कुमारी की काफी खो’जबीन के बाद भी अभी तक कोई पता नहीं चल सका है. घंटों बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई पता नहीं चल पाने की वजह से परिजनों के बीच कोह’राम मचा है. घटना के संबंध में मृतक सुहानी के परिजनों ने बताया कि वह आज सुबह घर से बकरी चराने के लिए निकली थी, कुछ घंटों के बाद ही गाँव के ही एक बच्चे ने सूचना दी कि सुहानी और सिमरन डू’ब गई है, घटना की सूचना मिलते ही मौके पर परिजन पहुँच कर अब तक उम्मीद जताये बैठे हैं कि कहीं सुहानी सकु’शल मिल जाये.

घटना की सूचना मिलते ही अहियापुर पुलिस मौके पर पहुँचकर गोताखोरों की मदद से डू’बी बच्ची सुहानी की खोज देर शाम तक की जाती रही पर कोई सफम’लता हासिल नहीं हुई. घटना के संबंध में अहियापुर के प्रभारी थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने बताया देर शाम तक बच्ची की तला’श जारी थी.

मुख्यालय से एसडीआरएफ टीम की मांग की गई थी पर बा’ढ़ प्रभा’वित तीन प्रखंडों में रे’स्क्यू में लगी एसडीआरएफ की टीम मौके पर नहीं पहुँच सकी. मंगलवार सुबह पुन: जिला प्रशासन को सूचना दे कर प्रशिक्षित गोताखोरों और एसडीआरएफ टीम की मदद से ला’पता बच्ची को ढूंढ लिया जाएगा.

वहीं मौके पर एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की टीम के नहीं पहुंचने पर परिजनों और स्थानीय लोगों में काफी आ’क्रोश व्या’प्त था. परिजनों का कहना था कि प्रशासन ने सही समय पर मुस्तै’दी दिखाई होती, एसडीआरएफ या एनडीआरएफ टीम समय से पहुँच जाती तो बच्ची को ब’चाया जा सकता था.

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