भोजपुरी फिल्मों के गानों पर आजकल भले ही चलताऊ होने के आ’रोप लगते हों, लेकिन कई गाने ऐसे भी हैं जिन्हें सुनकर आप गुनगुनाए बिना नहीं रह पाएंगे। इसमें पा’र्श्वगायक मो. रफी का भी योगदान रहा है।
भोजपुरी की पहली फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ को रफी ने अपनी सुरीली आवाज से सं’वारा है। फिल्म ‘बलम परेदेासिया’ में र’फी का गाया ‘गोरकी पतरकी रे…’ तो तब सबी जु’बान पर चढ़ गया था। पुण्यतिथि के अवसर पर मो. रफी के सदाबहार भोजपुरी गीतों पर आइए डालते हैं नजर…
भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत साल 1960 के दशक में हुई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.
राजेंद्र प्रदेश के आग्रह पर नाजिर हुसैन ने 1963 में पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पीयरी चढ़ाईबो’ बनाई। इसमें रफी का गाना ‘सोनवा के पिंजरा में बंद भइल हाय राम…’ हिट रहा। शैलेंद्र के लिखे इस गीत को चित्रगुप्त ने संगीत दिया है।
बलम परदेसिया: गोरकी पतरकी रे
बीते जमाने की फिल्म ‘बलम परदेसिया’ का गीत ‘गोरकी पतरकी रे…’ कौन भूल सकता है? इस गीत को स्वर दिया है आशा भोंसले व मो.रफी ने। अंजान के लिखे इस गीत के भी चित्रगुप्त ने संगीत दिया है। रफी के कुछ गीत समय की गर्द के नीचं भी दब गए हैं। ऐसा ही एक गीत है-‘हम गरीबन से भइल प्यार बलम कैसे कह…’, तो भोजपुरी में है।

Input: Jagran