पटना के 17 स्कूलों के बच्चे दू’षित पानी पीने को मजबूर हैं। पीएचईडी जल जां’च केंद्र ने डेढ़ महीने पहले मनेर के 12, बख्तियारपुर के 1 और दानापुर के 4 स्कूलों के चापाकल में आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मानक से काफी अधिक पाए जाने की रिपोर्ट जारी की थी।
इसमें आर्सेनिक की मात्रा 10 पीपीबी (पार्ट पर बिलियन) से अधिक और आयरन की मात्रा 1.0 मिलीग्राम से अधिक पाई गई है। स्कूलों का पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बावजूद पीएचईडी की लापरवाही बच्चों के प्रति इस कदर है कि अबतक इस ओर कोई ठो’स कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
जिन स्कूलों में चापाकलों का पानी आर्सेनिक युक्त पाया गया था, वहां डी बोरिंग लगाने के दावे किए गए थे। नल जल योजना के तहत पानी आपूर्ति की योजना थी। लेकिन ये दोनों योजनाएं ध’रातल पर नहीं उतर सकीं। डी बोरिंग 125 मीटर की ग’हराई पर लगाई जाती है। फिल्टर 100 फुट नीचे दिया जाता है। जिससे पानी की शुद्धता बनी रहती है।
सरकार के रिकार्ड अनुसार पीने योग्य पानी में आर्सेनिक की मात्रा 10 पीपीबी से कम होनी चाहिए। आयरन की मात्रा प्रति लीटर 0.3 मिली ग्राम रहनी चाहिए। फ्लोराइड की मात्रा 1.0 मिली ग्राम/लीटर रहनी चाहिए। पानी में इससे अधिक मात्रा होने पर उसकी गुणवत्ता बेहतर नहीं मानी जाती है।
आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड युक्त पानी लंबे समय तक पीने पर इससे कई तरह की बी’मारियां होती है। जैसे किडनी, लिवर, पेट से संबंधित गं’भीर बी’मारियां होती हैं। करुनेश कुमार नारायण (कार्यपालक अभियंता, पश्चिमी पीएचईडी) ने कहा- पश्चिमी पटना में स्कूलों के चापाकलों का पानी दू’षित पाया गया है। उसकी रिपोर्ट हमें अब तक नहीं मिली है। पीएचईडी जल जांच केंद्र से रिपोर्ट मंगाकर देखेंगे। उसके बाद ही कुछ किया जा सकता है।

Input: Hindustan