
PATNA : राज्य सरकार के आदेश पर गृह विभाग द्वारा गत मंगलवार को डेढ़ दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों का तबा’दला किया गया था. गृह विभाग के आदेशानुसार सेंट्रल रेंज पटना के डीआईजी राजेश कुमार को बेगूसराय में नवसृजत रेंज का पहला पुलिस उपमहानिरीक्षक बनाया गया है. शुक्रवार 16 अगस्त से उन्होंने पदभार ग्रहण करते हुए योगदान दिया है. कार्यभार संभालने के बाद डीआईजी राजेश कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था का जा’यजा लिया और पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग की.

योगदान करने के पहले दिन से ही डीआईजी पुरे एक्शन में दिखे. योगदान करते ही बेगूसराय रेंज में उन्होंने दो अभि’यानों की शुरुआत कर दी है. अप’राध और अप’राधियों के खिलाफ अपने चिर परिचित स’ख्त ते’वर रखते हुए उन्होंने अप’राधियों के खिलाफ पटना की ही तर्ज पर अभि’यान शुरू किया है. इसके साथ ही दूसरा अभि’यान शहर में सुचारु यातायात व्यवस्था को लेकर शुरू किया गया है. इसके लिए उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये हैं.

पटना के सेंट्रल रेंज के डीआइजी रहे राजेश कुमार का कार्यकाल हमेशा से निर्वि’वाद रहा है. जिस जिले में भी पदस्थापित रहे वे हमेशा अप’राध और अप’राधियों के खिलाफ अभि’यान चलाते रहे हैं. गरीबों के लिए संवे’दनशील और सहृदयता रखने वाले डीआईजी राजेश कुमार की कुछ न कुछ अलग करने की चाहत हमेशा ही किसी न किसी नवीन शुरुआत व एक नई पहल को जन्म देती है, जो जनकल्याणकारी होता है और गरीबों के हित में हमेशा ही फलदायी साबित होता है.

वर्ष 2012 में मुजफ्फरपुर के एसएसपी पद पर रहते हुए उन्होंने एक अनोखी पहल के तहत बंदू’क, हथि’यार को ग’लाकर खेती के औ’जार और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार करवाई थी. पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार पहले ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने एक नवीन पहल करते हुए क्रा’इम टू क्रिएशन की शुरुआत की थी.

क्रा’इम टू क्रिएशन के तहत विभिन्न आप’राधिक मामलों में जप्त हथि’यारों को जिले के मुशहरी इलाके में लोहार की मदद से उसे ग’ला कर खेती करने के औ’ज़ार तैयार करवाए थे. इस कार्य के लिए उन्होंने विशेष तौर पर न्यायालय से अनुमति प्राप्त की थी. इसके साथ ही उन्होंने समाज को यह सन्देश दिया था की अप’राध करने और दह’शत फ़ैलाने के उद्देश्य से प्रयोग किये जाने वाले हथि’यारों को संशोधित (गला) कर उनका उपयोग समाज को सका’रात्मक दिशा से जोड़ने और निर्माण जैसे कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

जिन हथि’यारों का उपयोग अप’राध के लिए किया जा रहा था वहीं उन्हें संशो’धित कर, उन्हें ग’ला कर उसका उपयोग निर्माण कार्य के लिए किया जा रहा है. पुलिस के इस पहल को बहुत सराहना मिली और एसएसपी राजेश कुमार का यह पहल काफी सफल रहा. उन्होंने इस योजना को बिहार के सभी जिलों में अपनाये जाने की मांग भी रखी थी. उन्होंने गंगा नदी के संर’क्षण को लेकर माई गंगा नाम से एक अभियान की भी शुरुआत की थी, जिसके तहत गंगा नदी, नदी के जीव-जंतु, नदी के किनारों का संर’क्षण और सुर’क्षा करना है. इसके साथ ही अ’वैध बालू ख’नन पर रो’क लगाने की दिशा में भी कार्यान्वित है.

उन्होंने “मददगार पुलिस” के नाम से गरीबों की मदद करने की मुहिम भी चलायी थी. पटना सेंट्रल रेंज के डीआईजी रहते हुए उन्होंने पटना और नालंदा जिले में वार्ड पुलि’सिंग की शुरुआत की थी. इसके तहत पटना और नालंदा जिले के हर वार्ड में पुलिस के दो जवानों की प्रतिनियुक्ति के साथ ही पुलिस बूथ का भी निर्माण किया गया था.

उन्होंने थानों में पहुँचने वाले फरिया’दियों के लिए नई व्यवस्था की शुरुआत करते हुए पेटि’शनर रिस्पॉन्स ऑफिसर (पीआरओ) का एक नया पद सृजित किया था. जिसमें थानों में शिकायतें लेकर आने वाले फरि’यादियों की शि’कायतें ओडी अफसर या मुंशी की जगह थानों में नया पद संभालने वाले पीआरओ द्वारा सुने जाने, फरि’यादियों का आवेदन लिखने और उस पर वि’धिसम्मत का’र्रवाई सुनिश्चित किये जाने की व्यवस्था की थी. डीआईजी श्री कुमार की सोच है की फरि’यादी थाने में घर जैसा वातावरण महसूस करें अतः थानों में दोस्ताना माहौल बनाने की दिशा में इस पहल की शुरुआत की गई थी.

पटना के सेंट्रल रेंज के डीआईजी रहे राजेश कुमार की विशेषता है की अपने कार्यक्षेत्र की पुलिस को टास्क देने के बाद खुद भी फील्ड में उतर जाते हैं और लगातार ऑनरोड रहकर अप’राधियों की ध’र-पकड़ करते हैं और खुद के मूवमेंट के साथ-साथ अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों के हर मूवमेंट पर भी नजर रखते हैं. इसी का नतीजा है की दिसम्बर 2019 में पटना के सेंट्रल रेंज के डीआईजी रहे राजेश कुमार द्वारा की गयी ताब’ड़तोड़ छा’पेमारी और पुलिस का’र्रवाई से महज 6 दिनों के अंदर करीब 800 अप’राधियों को गिर’फ्तार किया गया था. गिर’फ्तार अपरा’धियों में ह’त्या, लू’ट, डकै’ती, रंग’दारी सहित अलग-अलग गं’भीर आप’राधिक वा’रदातों में लंबे वक्त से फ’रार चल रहे अप’राधी शामिल थे.

