
SARAN (ARUN KUMAR) : तरैया, मशरख व बनियापुर के तेज-तर्रार एवं ईमानदार पूर्व थानाध्यक्ष सब इंस्पेक्टर मिथलेश कुमार अब नहीं रहे. सारण जिला खासकर तरैया, मशरख व बनियापुर के लोगो के लिए कर्मठ एवं अप’राधियों से किसी भी क्षण लोहा लेने को तैयार रहने वाले जाबांज पुलिस अधिकारी थे. एसआईटी प्रभारी पद पर रहते हुए उन्होंने कई खु’लासे किये थे.

सारण पुलिस के जांबाज दारोगा मिथिलेश कुमार की शहा’दत की खबर सुनते ही पूरा सारण पुलिस महकमा सद’मे में है. दरअसल, छपरा के मढौरा में मंगलवार शाम पुलिस की एसआईटी टीम और अपरा’धियों के बीच मुठ’भेड़ में दारोगा मिथिलेश कुमार को गो’ली लगी और उन्होंने मौके पर ही द’म तो’ड़ दिया. उनके साथ ही सिपाही फारूक अहमद की भी मौ’त हो गई. वहीं एक सिपाही रजनीश कुमार की चिं’ताजनक स्थिति देख कर उनके बेहतर इला’ज हेतु पीएमसीएच रे’फर कर दिया गया है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार उजली बोलेरो में एसआईटी टीम के प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मी इनपुट के आधार पर का’र्रवाई करने मढ़ौरा थाना क्षेत्र के पुरानी स्टेट बैंक के समीप पहुंचे थे. मंगलवार शाम एसआईटी मुख्यालय से जब सब इंस्पेक्टर मिथिलेश निकले थे तो काफी खुश थे, कोई बड़ा इनपु’ट मिला था. अपने साथियों से उन्होंने कहा कि चलो बड़ा शि’कार करते हैं और बोलेरो गाड़ी लेकर मढौरा की ओर निकल गए.

लेकिन थोड़ी देर बाद ही ऐसी खबर आई जिसने पूरे सारण पुलिस महकमे समेत सूबे के लोगों को सकते में डाल दिया. सारण पुलिस के तेज-तर्रार एवं ईमानदार दारोगा मिथिलेश कुमार अब नहीं रहे. इस खबर ने सबको विच’लित कर दिया. आरा जिला निवासी मिथिलेश कुमार तरैया थाना में 14 अगस्त 2011 से 22 नवम्बर 2013 तक थानाध्यक्ष पद पर पदस्थापित रहते हुए जनता की भलाई और उन्हें न्या’य दिलाने के लिए दिन रात जुटे रहते थे.

उनका कार्यकाल इतना बेहतर रहा कि आज भी तरैया की जनता उनके तबा’दले के बाद उनके लिए आँ’सू ब’हाती है. तरैया में ही उन्होंने सारण जिले का सबसे पहली बार थानाध्यक्ष का कमान संभाला और ईमानदार दरोगा के नाम से क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गये थे. अपने कुशल व्यवहार और कर्त’व्यनिष्ठा से लगभग छः माह में ही अमीर से लेकर गरीब तक के दिलों पर अपना क’ब्जा जमा लिया.

पीड़ित जब फरि’याद लेकर उनके पास आते थे तो उन्हें पूर्ण यकीन होता था कि अब उन्हें न्याय मिल जाएगा. अप’राधी भी मिथिलेश कुमार का नाम सुनकर सिहर जाते है. मिथिलेश के व्यवहारकुशलता और विनम्रता के कारण तरैया के लोग हमेशा थानाध्यक्ष के रूप में मिथिलेश कुमार को ही देखना चाहते थे. तरैया से मिथिलेश कुमार को मशरख का थानाध्यक्ष बनाया गया.

मशरख में भी उन्होंने अपने व्यक्तित्व और सौम्यता से क्षेत्र की जनता के बीच लोकप्रिय हो गए. मशरख थानाध्यक्ष के बाद जनता बाजार थानाध्यक्ष बने वहाँ भी उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी. फिर बनियापुर के थानाध्यक्ष बने और बनियापुर के लोगो के दिलों पर ऐसा राज किया कि जब 11 फरवरी 2019 को उनका जिला स्थाना’न्तरण हो गया तो बनियापुर की जनता ने दूल्हे की तरह विदाई रथ पर बैठाकर उन्हें विदा किया था.

स्थानीय लोगों ने उनके विदाई के दिन वि’दाई जुलूस निकाला जिसमें हजारों की संख्या में फूल-माला लेकर लोग शामिल हुये थे. उनकी वि’दाई पर हर किसी की आँखें भींगी थीं. स्थानीय लोगों का हु’जूम देखकर सारण एसपी भी मिथिलेश कुमार से काफ़ी प्रभा’वित हुए थे और उन्हें 12 फरवरी 2019 को बेस्ट थानाध्यक्ष अवार्ड से सम्मानित किया था.

मिथिलेश कुमार भोजपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र नागोपुर गांव निवासी दशरथ साह के काबिल पुत्र थे. उनके पिता दशरथ साह रेलवे के रि’टायर सब इंस्पेक्टर थे. उनका परिवार आरा शहर के मझौंवा में रहता है. वहीं मिथिलेश की शहा’दत की खबर मिलते ही परिवार व गांव में कोह’राम मच गया. सूचना मिलते ही गांव के लोग शहीद दारोगा के घर पहंच उनके परिजनों को ढा’ढ़स बधाने और सां’त्वना देने पहुँच रहे हैं. बताया जाता है कि दारोगा मिथिलेश कुमार का विवाह तीन-चार वर्ष पहले ही हुआ है और उन्हें अभी उसे कोई संतान भी नहीं थी.

