राजधानी दिल्ली में ख’तरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना के पानी से खुद को बचाने के लिए एक गर्भवती महिला और उसके परिवार को पूरी रात एक पेड़ पर बितानी पड़ी। दरअसल नई दिल्ली के उस्मानपुर इला’के में उसकी झोपड़ी पानी में डू’ब गई थी।
जब बा’ढ़ का पानी उसके घर में घुसने लगा तो ड’र के मा’रे नूरजहाँ अपने दो बच्चों को बचाने के लिए लकड़ी के ढेर के सहारे पेड़ पर चढ़ गई। जब उसका पति जहाँगीर (रिक्शा चालक) देर रात घर वापस आया, तो उसे भी पेड़ पर ही शरण लेनी पड़ी।एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि परिवार ने पूरी रात पेड़ पर बिताई और बुधवार सुबह 11 बजे पुलिस को फोन किया। पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों की एक टीम मौके पर पहुंची और परिवार को दोपहर 12 बजे बचाया गया। नूरजहाँ ने कहा कि वह अपने पति को फोन नहीं कर सकी, क्योंकि वह इतनी बुरी तरह से डर गई थी कि कुछ सोचने-समझने की हालत में नहीं थी।
यमुना नदी का जलस्तर कम होना शुरू
यमुना का जलस्तर बुधवार शाम से धीरे-धीरे घ’टना शुरू हो गया, लेकिन नदी अभी भी ख’तरे के नि’शान से ऊपर बह रही है। बा’ढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, जलस्तर दोपहर बाद दो बजे 206.60 मीटर था, जो शाम के पांच बजे घटकर 206.50 मीटर पर आ गया।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि जलस्तर में और गिरावट आने की संभावना है क्योंकि हरियाणा ने अब तक बड़ी मात्रा में हथिनीकुंड बैराज से पानी नहीं छोड़ा है। शाम 4 बजे हथनी कुंड बैराज से केवल 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
नदी सोमवार को खतरे का निशान 205.33 मीटर को पार गई। इसकी वजह से निचले इलाकों में आई बाढ़ के कारण वहां रहने वाले 15,000 से अधिक लोगों को विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा स्थापित शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।

