जिले के कासिम बाजार थाना क्षेत्र के हेरु दियारा के डकरा गांव में पेशे से मजदूर कृष्णा यादव की पत्नी मीना देवी एक ज’हरीले सांप को अपनी बेटी की तरह से पाल रही हैं। सांप का बच्चा भी ममता की छांव पाकर अपनी मां की हर बार मानता है।मीना देवी ने बताया कि मेरे तीन बच्चे थे। दो बेटे और एक बेटी को मैं अपने बच्चे की तरह पाल रही थी। जन्म के 4 दिन के अंतराल में दो सांपों की मौ’त हो गई और बस अब एक यही जिंदा है।

मैं इसके जीवन को लेकर चिं’तित रहती हूं। कभी वह दोनों म’रे हुए सांपों को लेकर मंदिर जाती है तो कभी वह घर के आंगन में बैठकर रो’ती भी है। अब बचे हुए एक सांप के बच्चे को लेकर वह घर का हर काम कर रही है।मीना देवी ने बताया कि अपने तीनों बच्चों के नाम उन्होंने आंधी, तू’फान और मेल रखा था। जिसमें से आं’धी और तू’फान की तो मौ’त हो गई है, लेकिन मेल नहीं म’रेगा अब यह हमेशा मेरे साथ रहेगा। मीना देवी की बातों को सुनकर और सांप को देखकर गांव वाले भी अचंभित हैं। गांव में कौ’तूहल का विषय है। घर पर सांप देखने वाले का दिन भर तांता लगा रहता है।
सांप लगभग 6 इंच का है। सिर पर खड़ाऊ का निशान भी है। काला रंग है।हल्का पतला है। एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह वह अपनी मां की हर बात मानता है। मां कहती है उठ जा बेटी दूध पी लो तो वह दूध की कटोरी के पास जाकर रुक जाता है। चलने कहती है तो चलने लगता है। रुकने कहती है तो रुक जाता है।वापस आने को कहती है तो वापस आ जाता है। खड़े होने को कहती है तो 2 इंच गर्दन ऊपर उठा देता है।
इस दृश्य को देखकर गांव वाले अचंभित हो जाते हैं। गांव के पंडित हरिमोहन, पप्पू, मुन्ना आदि ने कहा आज तक हमने ऐसी घ’टना नहीं देखी और ना सुनी कि सांप अपने मां की हर बात मानता है।वह दिन भर खेलते रहता है आंगन में, लेकिन कहीं बाहर नहीं जाता। जब वो थक जाता है तो मेरे पास आकर चुपचाप सो जाता है। रात में भी निकल कर कहीं बाहर नहीं जाता।

