#PATNA #BIHAR #INDIA : पटना को स्मार्ट बनाए जाने की प्लानिंग की कलई खुल गई है। स्मार्ट सिटी के नाम पर कुछ अफसरों ने मनमानी की है। ऐसे तमाम काम गुपचुप स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा बना दिए गए, जो मूल योजना में शामिल ही नहीं थे। इस मनमानी की पोल खोली खुद प्रमंडलीय आयुक्त सह पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने।

उन्होंने कहा कि कैसे आठ सड़कों को बिना किसी स्वीकृति के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा बना दिया गया। राज्य सरकार को पत्र भेज इस गड़बड़ी से अवगत कराते हुए मार्गदर्शन मांगा है। केंद्र सरकार ने देश में सौ शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का एलान किया था। इनमें बिहार से चार शहर पटना, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और भागलपुर शामिल हैं। पटना तीसरे चरण में चयनित हुआ था।

राज्य के दूसरे निकायों की समीक्षा के क्रम में अब तक विभाग स्तर से पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पीठ ठोकी जाती रही है। मगर हाल में हुए कुछ प्रशासनिक परिवर्तनों के बाद अब पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कार्यों में हुई मनमानी खुलकर सामने आ गई है।

प्रमंडलीय आयुक्त ने राज्य सरकार को भेजे पत्र में लिखा है कि समीक्षा में यह सामने आया है कि पटना में स्मार्ट रोड नेटवर्क के तहत कुल 16.7 किलोमीटर की सड़कों को प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। इनकी लागत 240 करोड़ है। वहीं अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट के लिए 63.1 करोड़ के प्रस्तावों की स्वीकृति राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा दी गई थी।

स्मार्ट सिटी में खेल
चयनित क्षेत्र से बाहर कराए जा रहे करोड़ों के काम
आयुक्त ने सरकार को पत्र भेजकर मांगा मार्गदर्शन
गड़बड़झाला
स्मार्ट रोड नेटवर्क के तहत 16.7 किमी सड़कों को स्वीकृति मिली थी
स्वीकृत सड़कों के अलावा आठ और सड़कों को कर लिया गया शामिल
20 करोड़ की सड़कों का बिना स्वीकृति हो रहा निर्माण
इन सड़कों के निर्माण पर उठाए सवाल
1-अशोक राजपथ से कलक्ट्रेट घाट तक
2-अशोक राजपथ से बीएन कॉलेज घाट तक
3-अशोक राजपथ से एनआईटी कॉलेज तक
4-अशोक राजपथ से कृष्णा घाट तक
5-अशोक राजपथ से गांधी घाट तक
6-अशोक राजपथ से दरभंगा हाउस तक
7-अशोक राजपथ से एनआईटी हॉस्टल तक