

इस पर अमल चालू माह से शुरू हो जाएगा। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में उचित देखभाल और चिकित्सा के अभाव में हर साल सैकड़ों दुधारू पशुओं की असामयिक मौत हो जाती है। दूध व इसके उत्पादों से होने वाली आमदनी को देखते हुए पशु पालक महंगे मवेशी पालते हैं। साहिवाल, जर्सी, फ्रिजीयम, गिर आदि अधिक दूध देने वाले बढ़िया नस्ल के गाय-भैंस पाले जाते हैं। आमतौर पर इनकी कीमत 45 से 80 हजार तक होती है। लेकिन अक्सर मामूली या किसी संक्रामक बीमारी से इनकी मौत होने के बाद पशु पालकों को भारी नुकसान होता है। इसका असर सामान्य कृषि कार्य पर भी पड़ता है। इसी के मद्देनजर सरकार ने बीमा योजना की शुरुआत की है।

बीमा की वार्षिक दर पशुओं के न्यूनतम मूल्य का अधिकतम तीन प्रतिशत होगी। सामान्य वर्ग (एपीएल) के लाभुकों को बीमा प्रीमियम की राशि का 50 प्रतिशत भाग स्वयं वहन करना होगा, जबकि बीपीएल श्रेणी के लोगों को मात्र 30 प्रतिशत ही राशि देनी होगी। बीमित पशुओं की पहचान के लिए उनके कान में ईयर टैग लगाया जाएगा। इसमें माइक्रो चिप लगा होगा, जिसमें पशु से संबंधित पूरा ब्योरा होगा बीमा योजना से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। चालू वर्ष में कम से कम 27 हजार दुधारू मवेशियों के बीमा का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को और बढ़ाया जाएगा।
