MOTIHARI (ARUN KUMAR) : पूर्वी चम्पारण के पताही में पुलिस पर हुए जानले’वा ह’मले मामले में मुखिया पति ध्रुपलाल मांझी समेत 44 आ’रोपितों को नामजद करते हुए एक सौ अज्ञात महिला व पुरुष पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए का’र्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस ने महिला शराब कारोबारी और पांच हमलावरों को गिरफ्तार किया है। मुखिया समेत पूरे गांव के अधिकांश लोग घर छोड़ कर फरार हैं। पुलिस द्वारा गि’रफ्तार आ’रोपितों में धांगड़टोली चौक निवासी रामचंद्र मांझी, महिद्र मांझी, नगीना मांझी, रामावतार मांझी, सुशीला देवी, पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के चोरमा गांव निवासी गोविद मांझी शामिल हैं।

इस बीच अस्पताल में इलाजरत पताही थानाध्यक्ष विकास तिवारी के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। हमले में घा’यल अन्य सभी पुलिसकर्मी खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। छापेमारी अभियान का नेतृत्व कर रहे मोतिहारी एएसपी अभियान एच एस गौरव ने बताया कि सभी ह’मलावरों की पहचान कर ली गई है, उनकी गिरफ्तारी के लिए मधुबन एसएसबी के कंपनी कमांडेंट जगत सिंह, पकड़ीदयाल डीएसपी दिनेश कुमार पाण्डेय, सिकरहना डीएसपी कुमार अनुभवी, इंस्पेक्टर अशोक महतो के नेतृत्व में टीम बनाकर लगातार छापेमारी हो रही है। टीम में पकड़ीदयाल थाना अध्यक्ष नित्यानंद चौहान, मधुबन थानाध्यक्ष संतोष कुमार, फेनहारा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार, पचपकड़ी थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार यादव, पताही से दरोगा बिरसा उरांव, सुनील सिंह, शिवजलिदर सिंह, जलेश्वर भागवत, श्याम नंदन दास आदि शामिल है।


एक पतीले में पकता चावल तो दूसरे पतीले में बनाई जाती है श’राब
पुलिस द्वारा श’राबबंदी को लेकर लोगों में जनजागरण अभियान के साथ अर्द्धनिर्मित शराब की विनष्टीकरण का अभियान चलाये जाने के बावजूद कुछ ऐसे इलाके हैं जहां अब भी यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इसी में शामिल हैं धांगड़टोली। घाय’ल पताही थानाध्यक्ष विकास तिवारी ने बताया कि इन बस्तियों में महिला और पुरुष दोनों चुलाई शराब बनाने के कार्य में जुटे हैं। एक ही चूल्हे पर सुबह उठकर सभी घरों की महिलाएं एक पतीले में भोजन तो दूसरे पतीले में शराब बनाने का कार्य शुरू कर देती हैं। शाम ढलते ही शराब कारोबार में शामिल लोग प्लास्टिक के बैग में 300 से 500 एमएल पॉलीथिन बैग बना कर कैरियर व विभिन्न माध्यमों से अन्य जगहों पर पहुंचाते है जहां से छोटे छोटे शराब कारोबारी आराम से प्लास्टिक के झोले में रखकर अन्य गांवों में पहुंचा देते हैं।
