#MUZAFFARPUR : निराला निकेतन में महावाणी स्मरण का आयोजन

#MUZAFFARPUR #BIHAR #INDIA : कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन की अध्यक्षता में काव्यपाठ करने वालों में कुमार राहुल -काल कुटिल हर क्षण /करे नग्न नर्तन,ईं सत्यनारायण मिश्र मयंक – ओ माता विंध्यवासिनी /तेरी महिमा अपार,डॉ रणजीत पटेल – नील गगन में खोया बादल /धरा माँगती पानी,शुभनारायण शुभंकर -बकवास लेकर क्या करूँगा,अंजनी कुमार पाठक – हे माँ जग कल्याण करो,गोविन्द कुमार मिश्र -संप्रभुता अक्षुण्ण रखो जी,रामवृक्ष चकपुरी – अपनी आजादी का तराना /आजन्म गाएँगे –सुनाकर सबको प्रभावित किया।

महावाणी स्मरण का आयोजन

‘आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री शब्द,स्वर,भाव,भाषा और कला के वैभवशाली व्यक्तित्व थे। वाणीसिद्ध साधक आचार्यश्री अपने अन्तर्राग से श्रोताओं तथा पाठकों को जीवनपर्यंत सम्मोहित करते रहे।शक्तिसाधना के श्रेष्ठ कवि आचार्यश्री गाते रहे -मैं गाऊँ तेरा मंत्र समझ /जग मेरी वाणी कहे,कहे ‘–ये बातें निराला निकेतन में आयोजित महावाणी स्मरण के अवसर पर ‘बेला’ के संपादक डॉ संजय पंकज ने ‘आचार्य जी की शक्ति साधना’पर बोलते हुए कही ।
डॉ पंकज ने आगे कहा कि आचार्य जी मातृवंदना के शाश्वत स्वर थे । उनके गीतों में आध्यात्मिक चेतना के अमर स्वर नैसर्गिक रूप से प्रवाहित होते हैं ।माँ सृजन की सुरसरि होती है और कविता सृजन की शाश्वत धारा । आचार्यश्री माँ और कविता को आ’त्मा में हर साँस जीते रहे।

आयोजन में श्यामल श्रीवास्तव,संजय पंकज,सत्येन्द्र सत्येन,विष्णु कांत झा,उमेश राज,ललन कुमार , वैद्यनाथ मिश्र,रामनरेश भक्त,नागेन्द्र नाथ ओझा, हरिनारायण गुप्त,शोभाकांत मिश्र ने भी अपनी रचनाओं से आयोजन को परवान चढ़ाया। आचार्यश्री के स्मारक स्थल पर कवियों की भावधारा प्रवाहित होती रही और वातावरण में माँ दुर्गा की नवमी पूजा के मंत्र गूँजते रहे ।आचार्यश्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके गीत – माँ श्यामा के अरुण चरण -का सामूहिक गायन किया गया ।स्वागत एच एल गुप्ता तथा संचालन डॉ हरिकिशोर सिंह ने किया।

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