#NEW_DELHI : अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने 18 वर्ष की आयु तक की लड़कियों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता पर बल देते हुए ‘गर्ल्स मार्च टू स्कूल’ नामक देशव्यापी जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस मार्च को संगठन ने नेशनल डे ऑफ एक्शन करार देते हुए इसका आयोजन पूरे देश में किया। मार्च में 18 राज्यों के 250 गांवों के 500 स्कूलों के माध्यम से 70,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। मार्च का आयोजन 18 राज्यों, जिलों और गांवों में किए जाने की खबर है। जिन 18 राज्यों में इसका आयोजन किया गया, उनमें झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश शामिल हैं।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की स्लम बस्तियों के बच्चों को भी मार्च में बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हुए देखा गया। इस अवसर पर केएससीएफ के कार्यकारी निदेशक श्री बिधान चंद्र सिंह ने कहा कि 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा एक मौलिक अधिकार है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 6 करोड़ 20 लाख 10 हजार बच्चे अभी भी स्कूलों से बाहर हैं। श्री सिंह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि 14-18 वर्ष के बीच आयु वर्ग में 28 प्रतिशत लड़कों की तुलना में 32 प्रतिशत लड़कियां स्कूलों में नामांकित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों को चाहिए कि आरटीई अधिनियम के माध्यम से वह अनिवार्य शिक्षा को लागू करे।

