पाकिस्तान एफएटीएफ में चारों तरफ से घिरता नजर आ रहा हे। भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस सहित अपने तमाम सहयोगी देशों को पाकिस्तान में फल फूल रहे आ’तंकवाद के बारे में ठोस जानकारी देकर एफएटीएफ में उसकी दिखावटी रिपोर्ट की पोल खोली है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि एफएटीएफ में पाकिस्तान का अपना बचाव कर पाना मुश्किल है। उसका ग्रे सूची में रहना तय है। उसे भविष्य में ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। उधर, पाक ने चीन, मलेशिया आदि देशों के जरिए कोशिश की है कि उसे ब्लैक लिस्ट न किया जाए। इसके लिए पाक को कम से कम 15 देशों का समर्थन चाहिए।

अमेरिका, फ्रांस से फट’कार
अधिकारियों ने बताया कि भारत के सबूत के आधार पर अमेरिका, फ्रांस जैसे देश पाक को फटकार लगा चुके हैं। एशिया पैसिफिक ग्रुप की रिपोर्ट भी पाकिस्तान के खिलाफ रही हे। पाक ज्यादातर मानकों पर खरा उतरने में विफल रहा है। उसने दिखावे के लिए कुछ कदम उठाए हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।जानकारों का कहना है कि ज्यादातर देशों को पाक की कार्रवाई के बारे में सही जानकारी है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अक्तूबर तक का समय दिया था। इस बीच में जितनी भी बैठकें हुई हैं उन सभी में पाकिस्तान की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया गया। जानकारों का कहना है कि पाक को छूट मिलने की वजह नहीं है।

अगर पाक को इस बार डार्क ग्रे सूची में डाला गया तो यह उसके लिए आखिरी चेतावनी होगी। अभी तक वह 27 में से करीब छह मानकों पर ही काम कर पाया है। एफएटीएफ 18 अक्तूबर को पाकिस्तान पर फैसले को अंतिम रूप दे सकता है। एफएटीएफ की समीक्षा में पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में रखा गया था। ग्रे सूची से बाहर आने के लिए उसके पास एक साल से ज्यादा का वक्त था।

Source : live hindustan
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