
NEW DELHI : सोमवार रात भारत चीन की भि’ड़ंत में गलवान घाटी पर हमारे 20 जवान शहीद हो गए. इन चीनियों ने भारतीय सैनिकों पर पूर्ण यो’जनाबद्ध तरीके से धो’खा देकर हमला किया था. शहीद कर्नल बी संतोष बाबू अपने 10 जवान के साथ ट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 14 से चीनियों को भारतीय इलाके में स्थित शि’विर ह’टाने का कहने गए थे. लेकिन 150 चीनी सैनिकों ने उन्हें अचानक घे’र लिया और लोहे की छड़ों से ताब’ड़तोड़ वा’र करने लगे. इसके कुछ समय बाद करीब 800 चीनी सैनिक और आ गए. इन सभी ने मिलकर शि’विर के बाहर स्थित करीब 150 निह’त्थे भारतीय जवानों को घे’र लिया.

चीन के इस अचानक हुए ह’मले ने भारतीय जवानों को चौं’का दिया था, हालाँकि उन सभी ने चीनियों का ड’टकर सा’मना किया. इस दौरान कुछ जवान पहाड़ी के किनारें आ पहुंचे और नीचे जा गि’रे. उनके साथ चीन के कुछ सैनिक भी नीचे गिरे. आर्मी के सीनियर अधिकार के अनुसार घा’यल जवानों का लेह हॉस्पि’टल में इला’ज चल रहा है. 24 सैनिक गं’भीर हैं जबकि बाकी 110 ख’तरे से बाहर हैं.
चुशूल में दोनों देशों के जनरलों के बीच बैठक हुई थी. इसमें इलाके को खाली करने की बात हुई थी. राष्ट्रीय सु’रक्षा सलाहकार परिषद से जुड़े पूर्व राजदूत पी स्टॉपडन के अनुसार चीन ने इस सीमा सं’धि का सीधे तौर पर उलं’घन किया है, लेकिन वो अपनी नी’तियों का राग अलाप रहा है. उधर र’क्षा मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा पी 14 के पास बने अपने अस्थायी शि’विर हटाने से इं’कार कर दिया था.

भारत एवं चीन के कोर कमांडरों के बीच 6 जून को यह सहमती हुई थी कि चीनी सैनिक 2-3 किलोमीटर पीछे हटेंगे. सीमा संधि के अनुसार चीनी सैनिकों को उनकी एलएसी पोस्ट-1 की तरफ वापस जाना था. ऐसे में कर्नल संतोष और उनके साथी जवानों को शिविर ह’टवाने के आदेश दिए गए. शि’विर को लेकर ही रविवार को पथ’राव भी हुआ था. चीन इसके लिए भारत को जि’म्मेदार ठ’हरा रहा था. फिर अगले दिन सोमवार की रात दोनों देशों के सैनिकों में खु’नी झ’ड़प हो गई.

गलवान घाटी के अभि’यान की जानकारी रखने वाले नई दिल्ली में सेना के एक अधिकारी ने बाताया कि भारत चीन सैनिकों की ये ल’ड़ाई करीब आठ घंटे तक चली थी. इसकी शुरुआत सोमवार शाम 4 बजे ही हो गई थी. भारतीय सैनिक निहत्थे थे और धो’खे से हुए इस ह’मले की उन्हें उम्मीद नहीं थी. दोनों देशों के बीच हुई इस संधि की पुष्टि दोनों ओर की सेना के अधिकारी कर रहे थे. ये प्रक्रिया 7 दिनों से चल रही थी. इसी संबंध में सोमवार दोपहर सेना के कमांडिंग अफसर (कर्नल संतोष) अपने 10 साथी जवानों के साथ पीपी-14 के पास चीनी सैनिकों के लौटने की जां’च पड़ताल कर रहे थे.

इस दौरान 20 सैनिकों को वापस लौटना था. लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया और भारतिय सैनिकों ने उन्हें ह’टने के लिए कहा तो ल’ड़ाई शुरू हो गई. इस ल’ड़ाई में भारतीय सै’निकों की संख्या बेहद कम थी. एक अनुमान के तौर पर 5 चीनियों के मुका’बले 1 भारतीय था. सोमवार शाम 6 बजे तक दोनों प’क्षों की ल’ड़ाई घमा’सान रूप ले चुकी थी. इस दौरान एक दुसरे से ल’ड़ते हुए कई सैनिक 15 हजार फीट ऊँची गलवान घाटी से नीचे गि’र गए. इसमें चीन के 40 से 50 जवान गिरे. भारत के कुछ जवान अभी तक लाप’ता है. इस मामले में अभी तक 17 जवानों के नदी में गिरने के कारण मौ’त की पुष्टि हो चुकी है.
