इंदौर। झाबुआ जिले में अंधविश्वास थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीमारी ठीक करने के अंधविश्वास में 15 दिन के दो नवजात बच्चों को उनके ही माता पिता ओझा (झांड फूंक करने वाला) के पास ले गए। उसने गरम सरिया बच्चों के पेट पर चिपकाया। जब बीमारी ठीक नहीं हुई तो बच्चों को लेकर माता-पिता डॉक्टर के पास लेकर आए।
पिटोल के निजी डॉक्टर राहुल के क्लिनिक पर ये दोनों बच्चे बुधवार को लाए गए। एक बच्चा कालापान निवासी नरेश बिलवाल का है, जिसका जन्म मंगलवार (27 नवंबर) शाम को पिटोल के सरकारी अस्पताल में हुआ था। परिवार वाले उसे रात में घर लेकर गए। बच्चे को थोड़ी छींके आई तो उसके परिवार वालों को लगा कि इसे हापलिया नाम की बीमारी हो गई है। वे रात में ही 15 किमी दूर गुजरात राज्य में आने वाले गांव जालत में ओेझा के यहां ले गए। उसने गरम सरिया पेट पर लगा दिया। जब बच्चा ठीक नहीं हुआ तो उसे बुधवार को माता-पिता पिटोल में डॉक्टर के पास लेकर आए।
दरअसल, जिले के ग्रामीण क्षेत्र में आज भी यह अंधविश्वास है कि छोटे बच्चों को सर्दी-खांसी से होने वाला कफ हापलिया बीमारी है और यह बड़वे द्वारा गर्म लोहे के सरिये से पेट पर डामने (जलाने) से ठीक भी हो जाती है। ओझा ने बच्चों के माता-पिता से 200-200 रुपए भी लिए।
दूसरा बच्चा 15 दिन का है, उसे भी बुधवार को उसके पिता कलसिंह भूरिया गोला बड़ी से पिटोल लाए। उसका वजन केवल 2.3 किग्रा था। इस बच्चे को भी जन्म के बाद ही सर्दी-खांसी होने से हापलिया बीमारी की आशंका में कलसिंह गुजरात के जालत गांव ले गए थे, जहां ओझा ने गरम सरिये से पेट पर जला दिया। जब कई दिनों तक बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो उसे कलसिंह बुधवार को पिटोल लेकर आए। डॉक्टर ने बताया कि बच्चों को जलाने के कारण सेप्टीसिमिया हो गया था। दोनों केस गंभीर होने के कारण रैफर कर दिए।