#KISHANGANJ : गर्मी में अगल’गी की घट’नाओं के रो’कथाम हेतु एसपी ने दिए आवश्यक निर्दे’श

KISHANGANJ (ARUN KUMAR) : एक बार फिर गर्मी का मौसम शुरू होते ही अगल’गी की घट’ना का ख’तरा मं’डराने लगा है। भविष्य में अगल’गी की ब’ढ़ती घट’नाओं की रो’कथाम को लेकर नया ए’क्शन प्ला’न बनाने की प्रक्रि’या तेज कर दी गई है। गर्मी के मौसम को देखते अगले चार माह ( मार्च से जून ) अगलगी की घट’नाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत ही संवे’दनशील माना जाता है। राज्य में भी’षण गर्मी पड़ती है। पछुआ हवा भी ब’हती है। ऐसे में गॉवों एवं शहरों में अगल’गी की घट’नाओं में बेतहाशा वृ’द्धि हो जाती है, जिससे भारी जा’न-मा’ल की क्ष’ति हो जाती है। अतः उक्त अव’धि में अगल’गी की घट’नाओं की रो’कथाम हेतु किशनगंज पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष द्वारा कई दिशा-निर्दे’श जारी किये गए हैं- उन्होंने संबं’धित अधिकारियों को निदे’श दिया है कि अधिकतम अग्नि प्रभावित स्थानों को चिन्हित कर आवश्यकतानुसार अ’ग्निशा’मक वाहनों को प्री-पो’जिशन मो’ड में रखा जाय ताकि अ’ग्निकां’ड होने पर अ’ग्निशा’मक वाहन घट’नास्थल पर यथाशीघ्र पहुंचकर अ’ग्निश’मन का कार्य त्व’रित गति से किया जा सके जिससे जानमाल की कम से कम क्ष’ति हो।   उन्होंने कहा कि अपने-अपने अ’ग्निशा’मालय अवस्थित अ’ग्निशा’मक वाहनों के ईंधन टंकी में ईंधन एवं वाटर टंकी में पानी हमेशा भरा होना चाहिए। घट’ना स्थल पर प्रस्थान करते समय अग्निशामक वाहन एवं अन्य प्रकार के अ’ग्निशा’मक उपक’रण के साथ-साथ व्यक्तिगत सुर’क्षात्मक उपक’रण भी साथ होना चाहिए। अपने-अपने अ’ग्निशा’मालय क्षेत्रों के अन्तर्गत भौगोलिक क्षेत्रों में जल स्रो’तों (सत’ही एवं भूगर्म) को चिन्हित करना। इसकी सूची तैयार कर एक प्रति ड्युटी रूम, एक-एक प्रति अ’ग्निशा’मक वाहनों में चालक को ध्यान में रखते हुए सभी वाहनों में रखा जाना। सम्बंधित पदाधिकारी अ’ग्निशा’मक वाहनों / पम्पों में खरा’बी आने पर अ’तिशीघ्र उसे नियमानुसार मरम्म’ति कराकर चा’लू की स्थिति में रखें। जिले में अधि’कतम अग्नि प्रभा’वित (हॉटस्पॉट) स्थानों को चिन्हित कर अ’ग्निशा’मक वाहनों को प्री-पोजिशन में रखा जाए। उन्होंने कहा कि दे;हाती क्षेत्रों में अगल;गी की घट’नाओं की रो’कथाम के लिए को;विड -19 प्रोटोकॉ;ल एवं सोशल डिस्टें;सिंग का अनुपा’लन करते हुए निम्नलिखित बिन्दुओं पर आमजनों को जाग’रूक एवं सत’र्क करने की का;र्रवाई की जाए:- हवा तेज होने के पूर्व खाना बना लें। विशेषकर जिनके घर फूस एवं खपरैल के हैं वे सुबह 08 बजे के पहले और रात्रि 07 बजे के बाद खाना बनाएँ तो बेह’तर होगा। जब तेज हवा चल रही हो तो खाना नहीं बनाएँ। चू’ल्हे में आ’ग ज’लाने से पहले सभी जरूरी सामान जु’टा लें ताकि जलता चूल्हा छोड़कर ईधर-उधर न जाना पड़े। चू’ल्हे में आग ज’लाने से पहले एक बाल्टी पानी तथा लोटा पास में साव’धानी के तौर पर अवश्य रखें। जहाँ पर भोजन बनाया जा रहा है, उसके आस – पास कोई भी सूखे जलावन का ढेर न रखें। भोजन बनाने के बाद चूल्हे के आग को पूर्ण रूप से पानी डा’लकर बु’झा दें। रसोई घर (खासकर फुस) को अ’ग्नि निरो’धक बनाने के लिए चारों तरफ के फुस के दिवारों को गिली मिट्टी, गो’बर एवं बालु का ले’प अवश्य लगाएँ। रसोई में कोई भी ते’ल, डी’जल, सिंथे’टिक कपड़े इत्यादि जैसे ज्व’लनशील पदार्थ का ढेर न रखें। दीप, लालटेन, मोमबती ढिबरी आदि को ऐसी जगहों पर न रखें जहाँ से गिरकर आ’ग लगने की संभा’वना हो। रा’ख फेकते समय यह सुनि’श्चित कर लें कि उसमें कोई चिं’गारी तो नहीं है। राख को खर-पतवार से अलग एक गड्ढे में फेंके। घर में हमेशा अ’ग्नि निरो’धक पदार्थ जैसे कि पानी, सुखी मिट्टी / धू’ल इत्यादि जमा कर अवश्य रखें। रोशनी के लिए बैटरी वाले संयंत्र जैसे टार्च, इमर’जेन्सी लाईट आदि का ही जहाँ तक संभ’व हो प्रयोग करें। जल स्त्रो’त के पास पम्पि’ग सेट / बोरिंग को तैयार हा’लत में रखने हेतु समु’दाय को प्रे’रित करना ताकि अगल’गी होने पर पानी की व्यवस्था आसानी से हो सके। यदि आसपास कोई तालाब या अन्य जलस्त्रो’त हो तो वहाँ से खलिहान तक पाईप (सिं’चाई में उपयोग आने वाला पाईप ) और पम्पसेट तैयार रखने हेतु ग्रामीणों को प्रे’रित करें। थ्रेसर का इस्ते’माल करते समय उसके पास पर्याप्त मात्रा में पानी रखें , क्योंकि इसके उ’ठने वाले आ’ग की लपटों से खेत – खलिहान एवं घरों में आ’ग लग सकती है। थ्रेस’र च’लाने में उपयोग आने वाले डीजल ईंधन या ट्रेक्टर के धु’ओं वाले पाईप ( साईलें’सर ) से हवा की दिशा में अनाज का बो’झा नहीं रखें। खलिहान के आसपास बी’ड़ी, सिग’रेट न पीये न किसी को पीने दें। बिजली के तार के किसी भी जो’ड़ को ढीला या खुला न छोड़े एवं नंगे बिजली के तार के नीचे ख’लिहान नहीं लगाए। मच्छ’रों से ब’चने के लिए पशुघर में घु’रा न लगावें। यदि लगाने की आवश्यकता हो तो घु’रा के पास पर्याप्त मात्रा में पानी का प्रबंध करें एवं सोने से पहले उसे पुरी तरह बु’झा दें।      

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