#MUZAFFARPUR : प्रकृति की मा’र व सरकारी उपे’क्षा के कारण जिले के किसानों का हाल बेहा’ल : ई. अजीत

MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : सरकारी उपेक्षा व  प्रकृति के बेरुखी के कारण जिले के किसानों का हाल पूरी तरह बेहाल हो गया है। स्थिति है कि जिले में अभी तक मात्र 20 से 25 प्रतिशत खेतों में धान की रोपनी हो पाई है। अधिसंख्यक किसान पूंजी व विपरीत मौसम के कारण धान का बिचड़ा अभी तक नहीं लगा पाए हैं। बीते दिनो आई सुनामी तुफान एवं असमय बाढ़, अतिवृष्टि के कारण फसलों की हुई बड़े पैमाने पर बर्बादी तो किसानों का कमर तोड़  दिया है। इस हालात में आज उन्हें खरीफ की खेती के लिए सरकारी सहायता नितांत आवश्यकता है। लेकिन इस मामले में सरकार की रवैया पूरी तरह उदासीन है। जो बेहद दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे में अब किसान को संगठित होकर अपने हक हकूक के लिए सड़क पर  उतरना पड़ेगा।  तभी उनकी बातें सुनी जाएगी और उन्हें उनका वाजिब हक मिलेगा। उक्त बातें शनिवार को कांटी क्षेत्र के  ढेमहां गांव में एनटीपीसी के पाइप लाइन, बरौनी गैस पाइप लाइन  तथा रेलवे लाइन के विस्तारीकरण से प्रभावित किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री श्री अजीत कुमार ने कहा। उन्होंने कहा कि तीन माह पूर्व सुनामी के कहर से जिले में दलहन, फल सब्जी, आम- लीची का फसल पूरी तरह बर्बाद हो गया था। उस वक्त सरकार की ओर से घोषणा की गई थी कि क्षति का सर्वे कराकर किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी । लेकिन आज तक न तो सर्वे हुआ न हीं मदद। आज पुण: असमय बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण लगाए गए फसल पूरी तरह बर्बाद हो गया है।अब  खरीफ की खेती सामने है। किसान आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गए हैं। इस समय उन्हें सरकार की ओर से आगे की खेती  के लिए मदद का दरकार है । लेकिन अखबारों में फसल क्षति का आकलन कराने की घोषणा सरकार की ओर से हो रही है, लेकिन यह घोषणा जमीन पर आने के बजाय कागज पर ही सिमट कर रह गयी है। परिणाम है कि अभी तक न तो किसान धान का बिचड़ा लगा पाए हैं , और न ही धान रोपनी कर पाए हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए  कि इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर  कार्रवाई करें। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि थर्मल पावर के इर्द-गिर्द सरकार कई सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कर रही है । अधिकारी किसानों का जमीन ओने पौने भाव  में लेना चाह रहे हैं। जब किसान अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हैं तो वे उनके बातों को सुनने के बजाय उन पर दमनात्मक कार्रवाई करने का उन्हें धमकी देते है, जो बेहद दुखद एवं अन्याय पूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी इन मामलों पर तुरंत संज्ञान ले एवं किसानों को उनका  वाजिब हक मिले इस पर कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि यदि किसानों पर जोर जुल्म हुआ तो हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। श्री कुमार ने किसानों का मंशा साफ करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि विकास के लिए सरकार  नया – नया प्रोजेक्ट लगावे किसान जमीन भी देने को तैयार हैं लेकिन अपने शर्तों पर। बैठक की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र चौधरी ने किया। मौके पर बैठक में किसान प्रतिनिधि सुबोध चौधरी, गुड्डू चौधरी, अशोक चौधरी ,मनोज चौधरी, मुरारी झा, विवेक रंजन, विनोद सिंह, अमलेश सिंह, पारसनाथ सिंह, मनोज शर्मा, बलिराम सिंह ,रामबालक सिंह, गरीब नाथ सिंह, श्री नारायण सिंह, भैरव पांडे, सुजीत कुमार सिंह आदि लोगों ने अपना अपना विचार रखा। साथ ही आवासीय दर से कम पर अपना जमीन किसी कीमत पर नहीं देने का संकल्प भी दोहराया।  
                         

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