कोरोना की दूसरी लहर भूल गए क्या? कई राज्यों में कोरोना का ख’तरा बढ़ा, फिर भी बिहार में लापरवाही बरतते दिखे लोग

एक ओर केरल और महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण का ग्राफ एक बार फिर बढ़ने लगा है तो दूसरी ओर राज्य में कोरोना मानकों को लेकर लोग लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पताल हो या बाजार और दुकानों की भीड़, बस स्टैंड हो या रेलवे स्टेशन, सड़क हो या मोहल्ले की गलियां सभी जगह लोग बिना मास्क पहने और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं।

त्योहारी मौसम में मिठाई, फल अथवा पूजन सामग्री की दुकानों पर बिना मास्क के नजर आते हैं। केरल, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत के राज्यों, जहां कोरोना संक्रमित तेजी से मिलने लगे हैं वहां से भी लोगों का बिहार आना जारी है। आगामी त्योहारों के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में लापरवाही कोरोना की तीसरी लहर के रूप में सामने आ सकती है। पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. बीपी चौधरी ने कहा यह लापरवाही ठीक वैसी ही है, जैसे हम कोरोना को आमंत्रित कर रहे हों। बच्चा-बच्चा अब मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ की धुलाई जैसे बचाव के उपायों से अवगत है। बावजूद अस्पताल से लेकर रेलवे स्टेशन तक लोग बिना मास्क के नजर आ रहे हैं। 

अस्पताल में मरीज के परिजन से गार्ड तक लापरवाह

पीएमसीएच सर्जिकल इमरजेंसी के बाहर और राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक के पास मरीजों के परिजन बड़ी संख्या में मौजूद थे। लेकिन इनमें से मात्र एक ही व्यक्ति मास्क पहने हुआ था। एक महिला अपने गले के नीचे मास्क लगाए दिखी। यहां तक कि इमरजेंसी गेट पर तैनात दो गार्ड भी गले पर मास्क लगाए थे न कि नाक और मुंह पर। ऐसा ही नजारा टाटा वार्ड के आसपास दिखा। बाहर चाय की दुकान और उसके बगल में 15-16 लोग बिना मास्क के ही खड़े दिखाई दिए। हालांकि यहां तैनात दोनों गार्ड मास्क पहने दिखाई दिए। 

सब्जी मंडी में टूट रही सोशल डिस्टेंसिंग

देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले एक बार फिर से तेज होने लगे हैं। लेकिन राजधानी की सब्जी मंडियों में आने वाले खरीदार और दुकानदार इससे अनजान हैं। राजेन्द्र नगर सब्जी मंडी में रविवार की शाम साढ़े चार बजे खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है। ज्यादातर खरीदारों के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा। सब्जी मंडी में भीड़ के चलते लोग एक-दूसरे से टकराते हुए चल रहे हैं। दुकानदार संतोष कुमार कहते हैं कि मंडी में सब्जी बेचने की मजबूरी है। मंडी के बाहर सब्जी की बिक्री बहुत कम होती है। खरीदार और दुकानदार के बीच दो से ढाई फीट की दूरी है। यहां भी ज्यादातर लोग बिना मास्क खरीदारी कर रहे हैं। मंडी के बाहर पुलिस गश्ती की गाड़ी गुजरती है। लेकिन मंडी में बिना मास्क लगाए लोगों पर अंकुश रखने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करती है। 

गले में मास्क, दुकानों से सेनेटाइजर गायब

बोरिंग रोड की बात करें तो कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर सड़क किनारे बाजार लगा हुआ है। रविवार को दोपहर से देर शाम तक लोगों ने खूब खरीदारी की। इसमें ज्यादातर लोगों के चेहरे पर न तो मास्क लगा हुआ था और न ही सामान खरीदने के बाद लोग सेनेटाइजर ही इस्तेमाल कर रहे थे। दूसरी तरफ पूजा का सामान बेचने वाले भी बिना मास्क के ही नजर आये। सड़क किनारे दुकान खुलने से पूरे क्षेत्र में भीड़ की स्थिति बनी हुई थी। न तो सोशल डिस्टेंसिंग थी और न ही लोग एक दूसरे को जागरूक कर रहे थे। कई दुकानों में सेनेटाइजर भी नहीं दिखा। लोगों में कोरोना संक्रमण का न तो डर दिख रहा था और न ही सावधानी बरत रहे थे। 

रेलयात्री भी लापरवाह

पटना जंक्शन से आने व स्टेशन परिसर में जाने वालों की भीड़ बढ़ी हुई है। यहां कोरोना से एहतियात को लेकर कमोबेश सभी बेखौफ दिखे। स्थिति यह रही कि लोग भीड़ के बीच आते-जाते दिखे। यही हाल सर्कुलेटिंग एरिया में भी रहा। प्लेटफॉर्म पर भी कई लोग मास्क उतारे हुए थे। हालांकि, यात्रियों में न तो कोरोना की गाइडलाइन का ध्यान रहा और न ही खुद के बचाव का। स्टेशन पर इंट्री के समय पहले से तैनात रहने वाले आरपीएफ व जीआरपी के जवान भी गायब दिखे।

ऐसी ही स्थिति दूसरी लहर से पहले फरवरी में हुई थी। उस समय कोरोना का केस कम होने से लोग पूरी तरह से लापरवाह हो गए थे। इसका खामियाजा दूसरी लहर के रूप में मार्च के अंतिम सप्ताह से भुगतना पड़ा था। बड़ी संख्या में लोग कोरोना के शिकार हुए। अत: लोगों को कोरोना को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस लापरवाही को हर हाल में दूर करना होगा, अन्यथा तीसरी लहर दस्तक दे सकती है। 
– बीपी चौधरी, प्राचार्य, पीएमसीएच। 

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