दरभंगा : राजकीय महारानी रमेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान में अगले सत्र से देश में पहली बार ज्योतिष आयुर्वेदिक चिकित्सा की पढ़ाई शुरू होगी। मिथिला दर्शन और ज्योतिष के मामले में आदि काल से प्रख्यात रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस पाठ्यक्रम का निर्माण किया गया है।
इस विधि से चिकित्सा भी शुरू कर दी गई है। मिथिला के लोगों में जन्मपत्री और हस्तरेखा में अटूट आस्था है। इसके कारण चिकित्सा शुरू होते ही यह आम लोगों में लोकप्रिय होने लगा है। इस पद्धति में जन्मपत्री और हस्तरेखा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक की भी नियुक्ति हो चुकी है। फिलहाल यह चिकित्सा सिर्फ संस्थान परिसर में ही उपलब्ध है। यह मानना है कि इस चिकित्सा के लिए बिल्कुल शांत वातावरण चाहिए जो आयुर्वेदिक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। विशेष कक्ष के निर्माण के बाद इसे अस्पताल में भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस पाठ्यक्रम में चिकित्सा में स्नातक, बीएससी या पारामेडिकल में स्नातक लोगों का ही नामांकन हो सकेगा। संस्थान में स्ववित्तपोषित योजनांतर्गत चार पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होगी। इनके पाठ्यक्रम का निर्माण कर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना को स्वीकृति के लिए भेज दिये गये हैं। साथ ही पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए अनुमति को राज्य सरकार के शिक्षा विभाग को भी पत्र भेजा गया है। राज्य सरकार से अनुमति मिलते ही विश्वविद्यालय से पाठ्यक्रम स्वीकृति का पत्र निर्गत कर दिया जाएगा।
इन पाठ्यक्रमों में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा इन मेडिकल एस्ट्रोलॉजी का एक वर्षीय पाठ्यक्रम भी शामिल है। इसके चार पत्र होंगे। इसमें नामांकित छात्रों को अस्पताल में इलाज सीखना होगा क्योंकि मरीज वहीं मिलेंगे। अन्य विषयों में एक वर्षीय मेडिकल डिप्लोमा इन मेडिसिनल प्लांट्स, दो वर्षीय डिप्लोमा इन आयुर्वेदिक फॉर्मेसी, दो वर्षीय एमएससी इन योगा शामिल हैं।