कर्नाटक : एयरपोर्ट पर ज’बरन 4 साल के एक बच्चे का कोविड-19 टेस्ट किया गया। बड़ी हैरानी की बात है कि लड़के के पिता एयरलाइंस के कर्मचारियों के सामने स्वास्थ्य मंत्रालय के गाइडलाइंस की दुहाई देते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। मामला बेंगलुरु के केंपोगौडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का है। बताया जा रहा है कि इस बच्चे और उसके माता-पिता के पास यूनाइटेड स्टेट का पासपोर्ट था। बच्चे को डिपार्चर से पहले ज’बरन कोविड-19 टेस्ट के लिए कहा गया। यूएस में रहने वाला भारतीय मूल का यह परिवार छुट्टियां बिताने पोर्ट ब्लेयर जाने की तैयारी में था।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्री-डिपार्चर या पोस्ट-अराइवल कोविड-19 टेस्ट से छूट प्राप्त है। 4 साल के बच्चे को कोविड-19 का टेस्ट कराने के लिए मजबूर करना मंत्रालय की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। ऐसा लगता है जैसे एयरलाइंस के कर्मचारी सरकार के गाइडलाइंस से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। 
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईटी प्रोफेशनल राजदीप गांगुली, उनकी पत्नी और उनका साल का बेटा इन सभी को यूएस की नागरिकता हासिल है। यह लोग कोरोमंगला के रहने वाले हैं। इन लोगों ने अंडमान और निकोबार में स्थित पोर्ट ब्लेयर में जाकर छुट्टियां बिताने की योजना बनाई थी।
यह परिवार गो फर्स्ट एयरवेज से 27 नवंबर को वहां पहुंचने वाले थे। इस दिन सुबह करीब 8 बजे यह परिवार एयरपोर्ट पहुंचा था। यहां बच्चे के माता-पिता उस वक्त दंग रह गए जब एयरलाइंस के स्टाफ ने उनके 4 साल के बेटे का RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट मांगा।