मुजफ्फरपुर। सालों से जर्जर सड़क पर चलना शहरवासियों को चलना मुश्किल है। स्थिति यह है कि शहरी क्षेत्र में कई सड़कें जर्जर है लेकिन निगम की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हालात यह है कि सिकंदरपुर सीढ़ी घाट रोड, कृष्णा सिनेमा के सामने वाली रोड, बेला रोड, बालूघाट बांध रोड, मझौलिया रोड, बीबी कॉलेजिएट रोड, रज्जू साह लेन, साहू पोखर रोड, केदारनाथ रोड सहित तीन दर्जन से अधिक सड़कें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।
इनका निर्माण नहीं कराया जा रहा है। सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी नगर निगम, जिला परिषद, डूडा एवं पथ निर्माण विभाग के पास है। सरकार की अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से इन संस्थाओं को सड़क निर्माण के लिए लाखों-करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया।
योजनाओं को पूरा करने में लापरवाही से जनता को जर्जर सड़कों पर हिचकोले खाने के लिए बाध्य कर रही है।
हालात यह है कि अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगने के बाद शहर की कई सड़कें बनाई तो गई, लेकिन बनने के साथ ही टूटने भी लगी।
कुछ ऐसी भी सड़कें है जो अभी पूरी तरह से बनी भी नहीं, लेकिन टूटने लगी है। सड़क के नहीं टूटने की तीन से पांच साल तक की गारंटी होती है।
इसके विपरीत सड़क से गिट्टी-बालू अलग हो जाती है। निर्माण के दौरान न तो प्रशासन घटिया सामग्री के प्रयोग को रोकने के प्रति सजग रहता और न ही अभियंता मौके पर उपस्थित होना जरूरी समझते।

