मुजफ्फरपुर : एसएसबी जवानों को ठंड में गश्ती करना चुनौती से कम नहीं

मुजफ्फरपुर। इंडो-नेपाल बॉर्डर पर ठंड और कोहरे में बॉर्डर पर गश्ती करने में एसएसबी जवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

दरअसल बॉर्डर पर तैनात एसएसबी जवानों के लिए हर दिन कोहरे और ठंड में गश्ती करने में बहुत दिक्कत होती है।

उत्तर बिहार में रक्सौल, बेतिया, मधुबनी और सीतामढ़ी में खुली सीमा पर ठंड और कोहरे में गश्ती करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

बार्डर से सटे नो मेंस लैंड के आसपास सरकारी और निजी भूमि पर बेतरतीब तरीके से निर्माण, ग्रामीण रास्ते, नदी का बहाव ये सब बैरियर बनते हैं।

ठंड और कोहरे में इनसे होकर अवांछित गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। इनपर नजर रखना सुरक्षा बलों के लिए चुनौती साबित होती है।

पूर्वी चंपारण के रक्सौल, आदापुर, छौड़ादानो और पश्चिम चंपारण के सिकटा, मैनाटांड, नरकटियागंज, ठोरी, बगहा आदि क्षेत्रों के एक दर्जन से अधिक प्रखंड नेपाल से जुड़े हैं।

इन इलाकों में प्रति दो किलोमीटर पर एसएसबी के स्थायी और अस्थायी कैंप हैं। करीब 135 किलोमीटर लंबे इस क्षेत्र में 80 से अधिक चौकियां हैं।

कमांडेंट प्रियव्रत शर्मा बताते हैं कि बार्डर की भौगोलिक स्थिति के कारण ठंड में कठिनाई हो रही, लेकिन गश्ती दल परिस्थिति के अनुरूप रणनीति तैयार कर मुस्तैद हैं। कोहरे से निपटने के लिए जवानों को ड्रैगन लाइट, एंटी फाग लाइट, अलार्म आदि आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। मधुबनी के मधवापुर, हरलाखी, बासोपट्टी, जयनगर लौकहा सहित अन्य प्रखंड नेपाल से सटे हैं। एसएसबी 48वीं वाहिनी जयनगर के कार्यवाहक कमांडेंट चंद्रशेखर का कहना है कि सीमा पर तैनात जवान ठंड व कुहासे में सर्च लाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीतामढ़ी में एसएसबी की 20वीं व 51वीं वाहिनी के कंधों पर सुरक्षा का दारोमदार है। 51वीं वाहिनी के कमांडेंट सुनील कुमार बताते हैं कि बार्डर पर रात में इलाके की दृश्यता कम होने से गश्ती चुनौतीपूर्ण है। दिसंबर के अंत से लेकर जनवरी के मध्य तक यह दृश्यता 100 मीटर से भी कम हो जाती है। ठंड में बार्डर इलाकों से अवांछित गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। रविवार की रात को ही नेपाल पुलिस ने बारा जिले से भारत लाए जा रहे करीब 150 किलो गांजे को रक्सौल बार्डर पर बरामद कर लिया। ग्रामीणों के अनुसार वाल्मीकिनगर से लेकर मधुबनी तक खुली सीमा पर अलग-अलग परिस्थितियों में गश्ती होती है। पुलिस चेकपोस्ट और एसएसबी बार्डर आउट पोस्ट से निगरानी करती है, ग्रामीण व जंगली रास्तों में सन्नाटा पसरा रहता है। ऐसे में तस्करी तो किसी भी चीज की हो सकती है।

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