पांच प्रतिद्वंद्वियों के बीच मूंछ की लड़ाई में बालू की नी’लामी से बिहार सरकार का खनन विभाग मालामाल हो गया। विभाग ने अवैध खनन से जब्त 3882 सीएफटी लाल बालू का बेस प्राइस एक लाख 59 हजार एक सौ 62 रुपये तय कर रखा था। इसे खरीदने को पांच लोगों ने निविदा डाली थी। बुधवार को बोली लगाने के लिए पांच लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे।

सभी बढ़-चढ़कर ऐसे बोली लगाने लगे कि रकम अंतत: एक करोड़ 20 हजार रुपये तक पहुंच गई। उच्चतम बोली यानी 65 गुना अधिक कीमत में बालू खरीदकर भोलू भुवराज इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर आनंद कुमार सिंह कलेक्ट्रेट से शान से निकलते दिखे। बालू की यह खेप सारण जिले के दरियापुर प्रखंड के मानुपुर एनएच-19 के किनारे रखी है।

3882 सीएफटी लाल बालू 38 ट्रैक्टर है। बाजार में प्रति ट्रैक्टर बालू की कीमत 47 से 48 सौ रुपये है। खनन विभाग ने बेस प्राइस 41 सौ रुपये प्रति ट्रैक्टर रखा था। खरीद मूल्य एक करोड़ बीस हजार के हिसाब से देखें तो एक ट्रैक्टर बालू की कीमत दो लाख 66 हजार पांच सौ रुपये हो जाती है। बहरहाल, खनन विभाग राजस्व में अप्रत्याशित वृद्धि होने पर अपनी पीठ थपथपा रहा है।

जिला प्रशासन ने विभिन्न स्थलों पर भंडारित जब्त बालू की खुले डाक के माध्यम से 17 घाटों की निविदा प्रकाशित की।

बुधवार को सिर्फ चार स्थलों के बालू के लिए डाक से नीलामी का आवेदन प्राप्त हुआ था। कुल बोली से एक करोड 63 लाख 50 हजार रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई है।

जिला खनन पदाधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि बोली लगाकर अगर कंपनी रकम जमा नहीं कराती है और बालू नहीं खरीदती है तो आगे की विधि अनुसार प्रक्रिया की जाएगी। रकम जमा नहीं करने पर कंपनी ब्लैकलिस्टेड कर दी जाएगी। वहीं अग्रधन की राशि भी जब्त कर ली जाएगी।
