मुजफ्फरपुर। एक बार फिर घो’टाला का मामला प्रकाश में आया है। जिले में बागमती परियोजना में हुए सात करोड़ घो’टाले की फाइल आठ साल बाद फिर खोल दी गई है।

इस घोटाले में सात कर्मियों की ब’र्खास्तगी व 117 लोगों पर नीलामवाद के मु’कदमे के बाद जांच एक बार फिर शुरू हुई है। भू-अर्जन निदेशक सुशील कुमार ने इसकी फिर जांच शुरू की है और भू-अर्जन पदाधिकारी को सारे रिकार्ड के साथ तलब किया है।
घो’टाले का जिन्न आठ साल बाद बोतल से बाहर आने के बाद विशेष भू-अर्जन कार्यालय के बचे कर्मियों में ह’ड़कंप मच गया है। विशेष भू-अर्जन कार्यालय फिलहाल कलेक्ट्रेट स्थित भू-अर्जन कार्यालय में ही समाहित कर दिया गया है।
भू-अर्जन निदेशालय बागमती परियोजना के घो’टाले में अब तक हुई का’र्रवाई से संतुष्ट नहीं है। सात करोड़ के घोटाले में सात कर्मियों की ब’र्खास्तगी के बाद बचे कर्मियों पर भी अब का’र्रवाई की त’लवार ल’टक गई है।
भू-अर्जन निदेशक सुशील कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जांच दल गठित कर दिया है। इस सिलसिले में भू अर्जन पदाधिकारी मो.उमैर को बागमती परियोजना के सारे द’स्तावेज के साथ पटना त’लब किया है।
जां’च के दायरे में विभाग के वे कर्मचारी हैं, जो संदेह का लाभ पाते हुए पिछली बार का’र्रवाई से बच गए थे। इतना ही नहीं, जिन फर्जी लाभार्थियों को मुआवजे के नाम पर सात करोड़ का भुगतान किया गया है, उनपर का’र्रवाई में शिथिलता बरतने के मामले में भी जांच शुरू हो गई है।


