बिहार बजट : शिक्षा में असमानता बढ़ी या घटी, जानें रिपोर्ट

बिहार : बिहार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021-22 के मुताबिक बिहार के स्कूली शिक्षा में लैंगिक अंतराल घट रहा है। साथ ही शिक्षा में सामाजिक असमानता के  घटने के भी सुखद संकेत दिख रहे हैं। दरअसल वर्ष 2012-13 से 2019-20 के बीच एससी-एसटी कोटे के विद्यार्थियों के नामांकन में क्रमश: 33.4 और 50.50 फीसदी का इजाफा हुआ है।

Changes beckon CBSE students in Kerala

साफ जाहिर है कि शिक्षा में सामाजिक असमानता में कमी आ रही है। दूसरी तरफ 2019-20 में प्रदेश के स्कूलों में हुए कुल 208.76 नामांकन में लड़कों की संख्या 106.37 लाख थी,जो लड़कियों की संख्या 102.39 लाख से कुछ ही अधिक है। रिपोर्ट ने अनुशंसा की है कि लैंगिक अंतराल को कम करने के लिए और अधिक प्रयासों की जरूरत है।

प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पिछले चार सालों में 40 हजार से अधिक शिक्षकों में इजाफा हुआ है। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक 2016-17 में प्रदेश के प्राथमिक- मध्य स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 3.9 लाख थी। वर्ष 2019-20 में यह संख्या बढ़ कर 4.3 लाख हो गयी है। इससे शिक्षक-विद्यार्थियों के अनुपात में कुछ सुधार हुआ है।

वर्ष 2019-20 में प्राथमिक स्तर पर 1.7 लाख और उच्च प्राथमिक स्तर पर 2.7 लाख शिक्षक थे। सर्वाधिक शिक्षकों वाले जिलों मसलन पटना में 23653, सीवान में 20326 और पूर्वी चंपारण में 20037 शिक्षक हैं। संख्या की भांति ही बिहार में प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 2016-17 में 72981 थी।

वर्ष 2020-21 में बढ़ कर 75295 हो गयी है। 75295 प्रारंभिक विद्यालयों में 42408 प्राथमिक और 32887 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। विद्यालय की संख्या के मामले में वर्ष 2019-20 में सबसे अधिक पटना में 4002, पूर्वी चंपारण में 3852, और मुजफ्फरपुर में 3201 विद्यालय हैं।

2012-13 से 2019-20 में प्राथमिक स्तर पर छीजन दर में 9 फीसदी और उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.9 फीसदी अंक की कमी आयी है। वर्ष 2012-13 में प्राथमिक स्तर पर लड़कियों की छीजन दर 26.3 प्रतिशत थी। इसमें अब 5.9 फीसदी घटकर यह छीजन दर 2019-20 में 20.4 प्रतिशत रह गयी है।

लड़कों की छीजन दर में 11.2 फीसदी की कमी आयी है. 2012-13 में लड़कों की छीजन दर 36 फीसदी से घटकर 2019-20 में घटकर 24.8 फीसदी रह गयी है। इसी प्रकार 2012-13 से 2019-20 के बीच उच्च प्राथमिक स्तर पर लड़कियों की छीजन दर 1.4 फीसदी अंक और लड़कों के लिए 12.3 फीसदी अंक घटी है।

अजा-अजजा विद्यार्थियों की छीजन दर में लगातार कमी हुई है। इसमें लड़कियों की छीजन दर लड़कों से कम रही है। माध्यमिक स्तर पर छीजन दर बढ़ी है। वर्ष 2012-13 में छीजन दर 62.8 से प्रतिशत से थी। 2019-20 यह छीजन दर 63.5 फीसदी हो गयी है। माध्यमिक में लड़कों की छीजन दर में 4.4 फीसदी अंकों की गिरावट हुई है। लड़कियों में इसका ठीक उलट स्थिति है। 2015-16 में कॉलेजों की संख्या महाविद्यालयों की संख्या 769 से बढ़कर 2020-21 में 902 हो गयी। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 2015-16 में 112 से बढ़ कर 2019-20 में 176 हो गयी है। शिक्षा के बजट में 2020-21 में कोरोना की वजह से कुछ कमी आयी है। 2020-21 में शिक्षा पर 12959 करोड़ खर्च हुए। इससे पहले के वित्तीय वर्ष में शिक्षा का 2019-20 में 28324 करोड़ का बजट था।

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