पटना के AG कॉलोनी में एक ऐसा स्कूल है, जहां बेटियां टॉयलेट के डर से पानी पीकर नहीं जाती हैं। गर्मी में प्यास से गला सूखता है, इसके बाद भी वह स्कूल में पानी नहीं पीती हैं। स्कूल में 6 से 7 घंटे वह कैसे बिताती हैं, यह वही जानती हैं। बिहार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के दावों की पोल खोलती स्कूल की व्यवस्था बालिका शिक्षा में बड़ी बाधा है।

AG कॉलोनी के मध्य विद्यालय में पढ़ाई कर रही छात्रा का कहना है कि सरकार बोलती है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लेकिन बेटियां जब पढ़ने आती हैं तो स्कूल में व्यवस्था नहीं होती है। जब सरकार एक टॉयलेट नहीं दे पाती है, बेटियों की लाज कैसे बचाएगी। छात्रा का कहना है कि वह घर से पानी पीकर नहीं आती है और स्कूल में भी पानी नहीं पीती है कि टॉयलेट लग जाए तो कहां जाएगी। स्कूल भी शहर में है, आस पास भी काेई जगह नहीं है। दूसरी छात्रा का भी वही दर्द है, वह भी टॉयलेट के डर से घर से पानी पीकर नहीं आती और न ही स्कूल में पानी पीती है। एक छात्रा कहती हैं कि वह बहुत दूर से आती है। गर्मी में पैदल आने से प्यास लग जाती है, इसके बाद भी वह पानी नहीं पीती है क्योंकि स्कूल में टॉयलेट की जरूरत पड़ी तो वह कहां जाएगी।

उनका कहना है कि शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से न तो घर से पानी पीकर आते हैं और न ही स्कूल में पीते हैं। प्यास लगती है पेट में दर्द हो जाता है लेकिन टॉयलेट के डर से वह पानी ही नहीं पीती हैं। ऐसे ही सभी छात्राओं की पीड़ा है, वह टॉयलेट के कारण परेशान हैं।

पटना के AG कॉलोनी में 1988 से मध्य विद्यालय चल रहा है। टीचर बताते हैं कि स्कूल के पास न तो अपना भवन है और न ही अपनी कोई व्यवस्था है। 1988 से ऐसे ही स्कूल चलाया जा रहा है। स्कूल में एक छोटा सा टूटा फूटा एक जर्जर कमरा है, पास में ही पुराना टूटा टॉयलेट है।

विद्यालय की शिक्षिका बताती हैं कि स्कूल में 408 स्टूडेंट्स हैं, जिसमें 80% छात्राएं हैं। दो कमरे होने के कारण स्टूडेंट्स को व्यवस्थित करने में बड़ी समस्या होती है। इस कारण से दो शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाना पड़ता है। इस कारण से बच्चों की पढ़ाई में भी बड़ी बाधा आती है।

पटना AG कॉलोनी के टीचर बताते हैं कि छोटा सा कमरा है जिसे बांस से बनाया गया है। इसमें एक साथ 3 क्लास के बच्चों को पढ़ाया जाता है। क्लास 4 से 5 के छात्रों को एक साथ पहली शिफ्ट में एक ही कमरे में पढ़ाया जाता है और 1, 2 और 3 क्लास के बच्चों के एक साथ बिठाया जाता है।

पहली से लेकर तीसरी क्लास के बच्चों को एक साथ पढ़ाया जाता है। टीचर का कहना है कि ऐसे में पढ़ाई कैसे होती है, यह वही जानते हैं। टीचर भी प’रेशान हो जाते हैं और बच्चे तो भीड़ में पढ़ाई नहीं कर पाते। टीचर का कहना है कि बार बार मांग की जाती है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।