बिजली : अब गली-मोहल्लों में नहीं दिखेंगे नं’गे तार, जानें….

अब गली-मोहल्लों में बिजली के नं’गे तार नहीं दिखेंगे। बिजली कंपनी ने ट्रांसफॉर्मर से लोगों के घरों तक पहुंचने वाली बिजली तार को कवर्ड रखने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य में विशेष अभियान चलाकर एरियल बंच केबल (एबीसी) लगाए जाएंगे। एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में इस पर काम शुरू हो जाएगा। बिजली कंपनी ने इसके पहले राज्य में जर्जर बिजली तारों को बदलने का अभियान चलाया था। इसके तहत अब तक 85 हजार किलोमीटर तार बदले जा चुके हैं।

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जर्जर तार बदलने के क्रम में कंपनी ने भीड़-भाड़, हाट-बाजार, आबादी वाले इलाकों में एबीसी लगाए हैं। इसका व्यापक असर दिख रहा है। खासकर जिन क्षेत्रों में बिजली की अधिक चोरी हो रही थी, वहां एबीसी लगने से इसपर लगाम लगा है। इसे देखते हुए ही कंपनी ने तय किया है कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी एरियल बंच केबल लगाए जाएं ताकि चोरी पर लगाम लग सके।

कंपनी का मानना है कि एलटी लाइन कवर्ड होने का लाभ बहुत होगा। खासकर कंपनी को हो रहे नुकसान पर काबू पाया जा सकेगा। तार कवर्ड होने के कारण अवैध तरीके से लोग बिजली का उपभोग नहीं कर सकेंगे। वैद्य उपभोक्ताओं को पोल पर लगे बॉक्स से ही कनेक्शन दिया जाएगा। दो पोल के बीच नंगा तार होने से अभी लोग टोंका फंसाकर अवैध तरीके से बिजली का उपभोग कर रहे हैं। कवर्ड होने पर लोगों की इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाया जा सकेगा।

राज्य में बिजली के तार की चपेट में आने से हर साल दर्जनों लोगों की मौत हो रही है। कई बार ऐसा हुआ है जब एक ही समय में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत बिजली के तार की चपेट में आने से हो गई थी। आंधी-पानी, तूफान या अन्य घटनाओं में बिजली के तार गिरने से जान-माल का नुकसान अब भी हो रहा है। कवर्ड वाले तार में यह समस्या दूर हो जाएगी।

राज्य में लगभग एक तिहाई बिजली का नुकसान हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 37.91 फीसदी, 2017-18 में 31.06 फीसदी नुकसान था। वित्तीय वर्ष 2018-19 में यह नुकसान घटकर 28.96 फीसदी पर आ गया लेकिन हर घर कनेक्शन के कारण राज्य में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी तो वर्ष 2019-20 में बिजली नुकसान बढ़कर 35.12 फीसदी हो गया।

2020-21 में कंपनी का तकनीकी व व्यवसायिक नुकसान 32.16 फीसदी रहा। इसको 15 पर लाना है जो कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है। अभी पांच लाख से अधिक मीटर लग चुके हैं। इस साल के अंत तक शहरी इलाकों में 23 लाख मीटर लगा दिए जाएंगे। जबकि ग्रामीण इलाकों में 36 लाख मीटर लगाने के लिए टेंडर जारी हो चुका है।

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